Edited By Tanuja,Updated: 31 Jan, 2026 01:44 PM

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना के दो सबसे वरिष्ठ जनरल झांग योउशिया और ल्यू झेनली को पद से हटाकर जांच के दायरे में डाल दिया है। इसे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि इससे PLA की आंतरिक राजनीति और सैन्य स्थिरता पर सवाल...
Bejing: चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख शी जिनपिंग ने देश की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों को अचानक पद से हटा दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि झांग योउशिया और ल्यू झेनली को “गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघनों” के आरोप में पद से हटाकर जांच के अधीन रखा गया है।
कौन थे ये जनरल?
झांग योउशिया अक्टूबर 2022 से PLA के सबसे वरिष्ठ जनरल थे। वे कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नीति-निर्माण निकाय पोलितब्यूरो के सदस्य और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष भी थे। ल्यू झेनली PLA aकी थल सेना के पूर्व कमांडर और CMC के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख रह चुके हैं। इन दोनों को शी जिनपिंग का करीबी और भरोसेमंद माना जाता था। झांग और शी के परिवारों के संबंध 1930 के दशक से चले आ रहे थे।
दोनों जनरल हाल तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दे रहे थे। किसी बड़े संकेत या चेतावनी के बिना उन्हें हटाया गया। 2024 से अब तक CMC के तीन अन्य सदस्य भी हटाए जा चुके हैं, लेकिन उनकी जगह किसी को नियुक्त नहीं किया गया। विश्लेषकों के अनुसार, दो संभावनाएँ सबसे मजबूत हैं -सीधे भ्रष्टाचार में संलिप्तता यानि सैन्य नियुक्तियों और हथियार खरीद में रिश्वत। उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना। एक चौंकाने वाले खुलासे में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया कि झांग पर चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी अमेरिका को देने जैसे गंभीर आरोप भी हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं किशी जिनपिंग की व्यक्तिगत सत्ता न तो कमजोर हुई है, न मजबूत।फिलहाल कोई ऐसा नेता नहीं दिखता जो उन्हें चुनौती दे सके।यह कदम PLA में “संस्कृति परिवर्तन” की शुरुआत का संकेत हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य नेतृत्व में उथल-पुथल से शी का सेना पर भरोसा डगमगा सकता है। इससे ताइवान पर संभावित हमले की संभावना अस्थायी रूप से कम हो सकती है।हालांकि, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि चीन की सैन्य क्षमता कमजोर या मजबूत हुई है। शी जिनपिंग पहले ही भ्रष्टाचार को “मुख्य संघर्ष” घोषित कर चुके हैं और साफ कर दिया है कि “भ्रष्ट तत्वों के लिए कहीं भी छिपने की जगह नहीं होनी चाहिए।”