तुर्किये ने दी सफाई; ‘सऊदी-पाक रक्षा समझौता ईरान के खिलाफ नहीं , जिसने हमला नहीं किया वो दुश्मन नहीं’

Edited By Updated: 09 Aug, 2026 03:22 PM

turkiye says mecca defence pact not aimed at iran

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। तुर्किये ने स्पष्ट किया कि समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। जरूरत पड़ने पर खुफिया, लॉजिस्टिक...

Dubai: तुर्किये के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, पाकिस्तान एवं तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। सऊदी अरब के युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए। समझौते में कहा गया है कि इनमें से किसी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तहत तेल संपदा से समृद्ध सऊदी अरब, परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और तुर्किये एक साथ आए हैं। तुर्किये के पास उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की दूसरी सबसे बड़ी सेना है और उसका रक्षा उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है।

 

ईरान में युद्ध के कारण क्षेत्र में बढ़ी अनिश्चितता और खतरों के बीच यह समझौता तीनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और संभावित हमलों को रोकने की उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। विदेश मंत्री हाकान फिदान ने तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी 'अनादोलू' को दिए साक्षात्कार में कहा कि तीनों देश किसी भी अन्य देश को तब तक अपना विरोधी नहीं मानते, जब तक वह उनके खिलाफ कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई नहीं करता। फिदान ने कहा, ''हमारे पास ऐसा कुछ भी लिखित नहीं है और न ही हमने किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें किसी साझा खतरे को परिभाषित किया गया हो। जो देश हम पर हमला नहीं करता, वह हमारा निशाना नहीं है।''

 

तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि समझौते में आपसी रक्षा से संबंधित प्रावधान ''तकनीकी रूप से'' नाटो की संधि के अनुच्छेद पांच के समान है। इस अनुच्छेद के तहत नाटो के 32 सदस्य देशों में से किसी एक पर हमले को सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। यह पूछे जाने पर कि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी, फिदान ने कहा कि किसी सदस्य देश को मदद के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध करना होगा तथा इसके बाद अन्य दो देश खतरे की प्रकृति के आधार पर खुफिया जानकारी साझा करने एवं रसद सहायता देने से लेकर सैन्य इकाइयों की तैनाती तक कर सकते हैं।

 

फिदान ने कहा, ''ये बहु स्तरीय मामले हैं और इनका स्वरूप खतरे की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग होगा। हमने अब तक अपने काम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है।'' तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ अन्य देशों ने भी इस समझौते में शामिल होने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मिस्र ''अगले चरण'' में इसमें शामिल होगा। उन्होंने मिस्र को एक ''स्वाभाविक साझेदार'' बताया। फिदान ने कहा कि समझौते के तहत तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख समिति की बैठकों में नियमित रूप से हिस्सा लेंगे। तीनों देश एक सचिवालय भी स्थापित करेंगे, जिसका मुख्यालय सऊदी अरब में होगा।  

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