Edited By Tanuja,Updated: 11 Jul, 2026 12:20 PM

अमेरिका और कनाडा के बीच टोल राजस्व को लेकर समझौता होने के बाद 4.7 अरब डॉलर का गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज 27 जुलाई को खोला जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए समझौते को अमेरिका के लिए बेहतर बताया। पुल से व्यापार बढ़ेगा और डेट्रॉयट-विंडसर सीमा पर...
International Desk: अमेरिका और कनाडा के बीच टोल राजस्व को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद सुलझ गया है।आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आपत्तियों के बाद कनाडा को टोल राजस्व समझौते में बदलाव करना पड़ा। दोनों देशों के बीच नई सहमति बनने के बाद गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज खुल जाएगा। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए "बेहतर और निष्पक्ष सौदा" बताते हुए कहा कि 4.7 अरब डॉलर की लागत से बना गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज अब 27 जुलाई से आम लोगों और वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। यह पुल अमेरिका के डेट्रॉयट (मिशिगन) को कनाडा के विंडसर (ओंटारियो) से जोड़ेगा।
यह पुल जून में शुरू होने वाला था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्तीय मुद्दों का हवाला देते हुए इसके उद्घाटन पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि पहले का समझौता अमेरिका के हित में नहीं था। कनाडा सरकार ने बताया कि दोनों देशों के बीच टोल संचालन, पारदर्शिता और क्षेत्रीय निवेश को लेकर नई सहमति बनी है। समझौते के तहत पुल से होने वाली आय का एक हिस्सा क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए 15 वर्षीय फंड में लगाया जाएगा।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए समझौते में अमेरिका को टोल राजस्व का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। साथ ही यदि टोल दरों में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव होगा तो अमेरिका को उसे वीटो करने का अधिकार भी होगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि पहले का समझौता स्वीकार्य नहीं था, लेकिन अब अमेरिका के लिए "बेहतर और निष्पक्ष" समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि अब पुल का उद्घाटन आगे बढ़ाया जाएगा। गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज से डेट्रॉयट और विंडसर के बीच मालवाहक ट्रकों की आवाजाही आसान होगी। यह मार्ग अमेरिका-कनाडा सीमा का सबसे बड़ा माल परिवहन कॉरिडोर माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, इस पुल के शुरू होने से सीमा पार करने में करीब 20 मिनट की बचत होगी और अगले 30 वर्षों में ट्रक ऑपरेटरों को लगभग 2.3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। इस पुल का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। परियोजना का वित्तपोषण कनाडा ने किया, जबकि इसकी लागत की भरपाई अगले 30 वर्षों में टोल शुल्क से की जानी थी। नया समझौता इस वित्तीय मॉडल पर क्या असर डालेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।