SC ने जन्म के आधार पर नागरिकता पर रोक लगाने वाले ट्रंप के कार्यकारी आदेश को किया रद्द

Edited By Updated: 30 Jun, 2026 10:30 PM

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सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता पर रोक लगाने वाले ट्रंप के कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया।

नेशनल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी इमिग्रेशन नीति पर बड़ा कानूनी झटका लगा है। मंगलवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (कार्यकारी आदेश) को रद्द कर दिया, जिसके जरिए जन्म के आधार पर मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता (बर्थराइट सिटिज़नशिप) को सीमित करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने साफ किया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता का अधिकार मिलता रहेगा।

क्या था ट्रंप का आदेश?

जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के पहले ही दिन ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य उन बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता मिलने से रोकना था, जिनका जन्म अमेरिका में हुआ हो लेकिन जिनके माता-पिता या तो अवैध रूप से देश में रह रहे हों या अस्थायी वीज़ा पर मौजूद हों। इस प्रस्तावित नियम के अनुसार, केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक या कानूनी स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हों।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने माना कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की मौजूदा व्याख्या ही लागू रहेगी, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता का अधिकार प्राप्त है।

14वें संशोधन पर क्यों टिका था पूरा मामला?

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की 'सिटिज़नशिप क्लॉज़' पर केंद्रित था। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म लेने या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आते हैं, अमेरिकी नागरिक हैं।

करीब 150 वर्षों से इस प्रावधान की व्याख्या यही रही है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता मिलती है, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। हालांकि, विदेशी राजनयिकों और दुश्मन सेना के कब्जे वाले क्षेत्रों से जुड़े कुछ सीमित अपवाद इसमें शामिल हैं।

ट्रंप प्रशासन का क्या था तर्क?

ट्रंप प्रशासन का कहना था कि संविधान में इस्तेमाल किए गए "अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाले" (Subject to the Jurisdiction Thereof) शब्दों की व्याख्या सीमित तरीके से की जानी चाहिए। प्रशासन का तर्क था कि अवैध प्रवासियों या अस्थायी वीज़ा पर रहने वाले लोगों के बच्चों को इस दायरे में नहीं माना जाना चाहिए।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि जन्म के आधार पर नागरिकता केवल उन परिवारों तक सीमित होनी चाहिए, जिनकी "मुख्य निष्ठा" अमेरिका के प्रति हो। प्रशासन के अनुसार, ऐसी निष्ठा केवल अमेरिकी नागरिकों और कानूनी स्थायी निवासियों में ही मानी जानी चाहिए।

विरोधियों ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि अमेरिकी संविधान, सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले और एक सदी से अधिक समय से चली आ रही न्यायिक परंपरा जन्म के आधार पर नागरिकता का स्पष्ट समर्थन करती है। उनका कहना था कि ट्रंप का आदेश संविधान की मूल भावना और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है।

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