Edited By Pardeep,Updated: 03 Oct, 2026 05:45 AM

फ्रांस में बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और व्यवस्थाओं की मांग को लेकर हाई स्कूल (लीसी) के छात्रों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो उठा है। देश भर में भड़की नई झड़पों के दौरान छात्र-छात्राओं ने इमारतों के बाहर आगजनी की और सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिसके...
पेरिस: फ्रांस में बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और व्यवस्थाओं की मांग को लेकर हाई स्कूल (लीसी) के छात्रों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो उठा है। देश भर में भड़की नई झड़पों के दौरान छात्र-छात्राओं ने इमारतों के बाहर आगजनी की और सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा के कारण देश के कुल 3,700 हाई स्कूलों में से लगभग 400 स्कूल पूरी तरह बंद रहे, जबकि 564 से अधिक स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया है।
शिक्षकों की कमी और लंबे घंटों का विरोध
सितंबर में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन तेजी से पूरे देश में फैल गया है, जिसमें अंतिम वर्षों की पढ़ाई कर रहे छात्र हिस्सा ले रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उनके स्कूल के घंटे बहुत लंबे हैं, क्लासरूम जरूरत से ज्यादा गर्म रहते हैं और शिक्षकों की भारी कमी है। मध्य पेरिस के तुर्गोट हाई स्कूल के 15 वर्षीय छात्र सिमोन ने बताया कि पूरे एक साल तक उनके पास साइंस के शिक्षक नहीं थे और ना ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध थीं।
पुलिसकर्मी की पिटाई और स्कूलों में आगजनी
विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। पूर्वी शहर बेलफोर्ट में युवाओं के एक समूह ने एक अकेले पुलिसकर्मी को घेरकर जमीन पर गिरा दिया और लातों से पीट-पीटकर बेहोश कर दिया। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस घटना को "अत्यंत हिंसक और असहनीय" करार दिया है; मामले में एक 17 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, पेरिस में लियोनार्डो द विंची और गैस्टन-बैचेलार्ड हाई स्कूलों के प्रवेश द्वारों पर आग लगा दी गई, जिसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा। वहीं ब्रेस्ट, टूलूज़ और ऑबेरविलियर्स में भी पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
65 कर्मचारी और 170 छात्र घायल, 100 से अधिक स्कूल क्षतिग्रस्त
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड जेफ्रे ने बताया कि छात्र आंदोलन को "अति-हिंसक असामाजिक तत्वों" ने बंधक बना लिया है। उन्होंने बताया कि इस हिंसा में 40 प्रिंसिपलों सहित 65 स्कूल कर्मचारी और लगभग 170 छात्र घायल हुए हैं, जबकि 100 से अधिक स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं दूसरी ओर, छात्रों ने भी पुलिस पर बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पुलिस विभाग ने 3 मामलों में आंतरिक जांच शुरू की है।
2,000 लोग हिरासत में, माता-पिता से वसूला जाएगा नुकसान का हरजाना
न्याय मंत्री गेराल्ड डारमेनिन के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से अब तक करीब 2,000 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें से 90 प्रतिशत नाबालिग हैं। न्याय मंत्री ने अभियोजकों से कहा है कि प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ और नुकसान के लिए छात्रों के माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाए और उनसे मरम्मत का खर्च वसूला जाए।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले गरमाई राजनीति
राष्ट्रपति चुनावों से महज छह महीने पहले शुरू हुए इस आंदोलन ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। सरकार ने वामपंथी पार्टी 'फ्रांस अनबॉव्ड' (LFI) और उसके नेता ज्यां-लुस मेलेंशोन पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है। वहीं LFI के वरिष्ठ नेता मैनुअल बोम्पार्ड ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर "षड्यंत्र की थ्योरी" गढ़ने का पलटवार किया है।