श्रीलंका पुलिस का एक्शनःजाफना में लिट्टे नेता थिलीपन की प्रतिमा हटाई, तमिल स्मृति समारोहों को लेकर फिर उठे सवाल(Video)

Edited By Updated: 27 Sep, 2026 08:03 PM

sri lankan police remove statue of banned ltte leader in jaffna

श्रीलंका पुलिस ने जाफना के नल्लूर में लिट्टे के पूर्व राजनीतिक नेता रासैया पार्थिपन उर्फ थिलीपन की कांस्य प्रतिमा हटा दी। कार्रवाई उनकी 39वीं पुण्यतिथि के कार्यक्रम के एक दिन बाद हुई। पुलिस के अनुसार प्रतिमा को लेकर शिकायत मिली थी। इससे पहले स्मृति...

Colombo: श्रीलंका पुलिस ने रविवार को जाफना के नल्लूर में प्रतिबंधित संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के नेता रासैया पार्थिपन उर्फ थिलीपन की प्रतिमा हटा दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस प्रवक्ता एफ. टी. वूटलर ने बताया कि शिकायत मिली थी कि लिट्टे से जुड़े एक व्यक्ति की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके बाद कांस्य की प्रतिमा हटा दी गई। लिट्टे भारत समेत कई देशों में भी प्रतिबंधित है। थिलीपन के नाम से जाने जाने वाले पार्थिपन को तमिल प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वह श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में अलगाववादी संघर्ष के दौरान लिट्टे के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में से एक थे।

 

दस दिन तक अनशन करने के बाद 26 सितंबर, 1987 को उनकी मौत हो गई थी। जाफना के नल्लूर में 18 सितंबर से उनकी याद में एक समारोह शुरू हुआ था। इससे पहले, कार्यक्रम स्थल पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पुलिस की रोक के खिलाफ समारोह में शामिल लोगों ने प्रदर्शन किया था। थिलीपन की मूल प्रतिमा को अतीत में कई बार नुकसान पहुंचाया गया था और इसके लिए सरकारी सैनिकों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

 

श्रीलंका ने पहली बार 1998 में लिट्टे पर प्रतिबंध लगाया था। नॉर्वे की शांति पहल को ध्यान में रखते हुए 2002 की शुरुआत में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था, लेकिन 2009 में यह फिर से लागू कर दिया गया। उसी साल मई में श्रीलंकाई सेना ने लिट्टे पर जीत की घोषणा की थी। लिट्टे ने लगभग तीन दशकों तक देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में समानांतर प्रशासन चलाया था और एक अलग तमिल ईलम (राज्य) स्थापित करने की मांग की थी। 

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