कठुआ बलात्कार पीड़िता के परिवार ने हैदराबाद मुठभेड़ पर जताई खुशी

Edited By Updated: 06 Dec, 2019 06:25 PM

family kathua rape victim expressed happiness over hyderabad encounter

कठुआ में पिछले साल जनवरी में सामूहिक बलात्कार और हत्या की शिकार आठ वर्षीय बच्ची के परिवार ने हैदराबाद में हुई मुठभेड़ हत्याओं पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि कम से कम उस पीड़िता के परिवार को लंबे मुकदमे का दंश नहीं झेलना पड़ेगा...

जम्मू: कठुआ में पिछले साल जनवरी में सामूहिक बलात्कार और हत्या की शिकार आठ वर्षीय बच्ची के परिवार ने हैदराबाद में हुई मुठभेड़ हत्याओं पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि कम से कम उस पीड़िता के परिवार को लंबे मुकदमे का दंश नहीं झेलना पड़ेगा।    

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कठुआ पीड़िता के पिता मोहम्मद अख्तर ने बताया कि अगर ये लोग अपराधी थे तो मुझे लगता है कि पीड़िता और उसके परिवार के साथ न्याय हुआ है। उन्होंने जो कुछ भी किया उसके लिए वे मौत के हकदार थे और कम से कम उस परिवार को अभियुक्तों के बरी होने का डर तो नहीं होगा। हैदराबाद में पशु-चिकित्सक के सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए चार आरोपी शुक्रवार सुबह साढ़े छह बजे पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। पुलिस आरोपियों को घटनाक्रम की पुनर्रचना के लिए घटनास्थल पर ले गई थी। 

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चारों आरोपियों की आयु 20 से 24 वर्ष थी। उनमें से एक लॉरी चालक था और बाकी सहायक थे। उन्हें 29 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों ने बलात्कार के बाद युवती की गला दबाकर हत्या कर दी थी और बाद में शव को जला दिया था। अख्तर ने कहा कि मेरी बेटी का मामला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर पठानकोट (पंजाब) की एक अदालत में चला गया और लम्बे मुकदमे के बाद मुख्य अभियुक्तों में से एक को रिहा कर दिया गया। एक अन्य जिसे किशोर बताया जा रहा है उस पर मुकदमा चल रहा है। 

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उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्याय प्रक्रिया तेज होनी चाहिए और अभियुक्तों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए ताकि इससे समाज के असामाजिक और आपराधिक तत्वों को सबक मिले। पठानकोट की जिला और सत्र अदालत ने इस मामले में छह लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने अपराध के साजिशकर्ता सांझी राम, एक विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, और परवेश कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई और विशेष पुलिस अधिकारी सुरेंद्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्ता को पांच-पांच साल कैद का आदेश दिया था। हालांकि, सांझी राम के बेटे को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया था। 

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