Edited By Ramkesh,Updated: 12 Apr, 2026 07:51 PM

राष्ट्रीय राजधानी के एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने नोएडा में एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 26-वर्षीय एक महिला के परिवार को करीब 1.56 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पीठासीन अधिकारी पूजा अग्रवाल मृतका सृष्टि सेठी की...
नेशनल डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी के एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने नोएडा में एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 26-वर्षीय एक महिला के परिवार को करीब 1.56 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पीठासीन अधिकारी पूजा अग्रवाल मृतका सृष्टि सेठी की मां और बहन द्वारा चालक, वाहन मालिक और दुर्घटना में शामिल कार के बीमाकर्ता के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रही थीं।
दावा करने वाले परिजनों के मुताबिक, 20 अक्टूबर 2023 की शाम को सेठी अपने सहकर्मी आदित्य शर्मा के साथ नोएडा के सेक्टर 62 के पास मोटरसाइकिल से घर लौट रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार कार ने दो अन्य वाहनों को टक्कर मारने के बाद पीछे से उनकी मोटरसाइकिल को भी टक्कर मार दी। सेठी की इस दुर्घटना में लगी चोटों के कारण दो जनवरी 2024 को मौत हो गई।
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में वाहन चलाने को ''लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना'' बताया। न्यायाधिकरण ने सात अप्रैल के आदेश में कहा, ''कानून का यह एक स्थापित सिद्धांत है कि याचिकाकर्ताओं से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे दुर्घटना को संदेह से परे साबित करें और 'रेस इप्सा लोक्विटर' (यानी 'चीजें खुद बोलती हैं') का सिद्धांत लागू होता है, जिसका अभिप्राय है कि एक बार आरोप पत्र में यह स्थापित हो जाने के बाद कि दुर्घटना हुई थी, यह साबित करने का भार प्रतिवादियों पर आ जाता है कि वे दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं थे और ऐसा करने में प्रतिवादी विफल रहे हैं।
न्यायाधिकरण ने चालक की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसके वाहन को किसी अन्य वाहन ने टक्कर मार दी थी और टायर फटने के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया था। उसने कहा कि चालक की दलीलों की पुष्टि साक्ष्यों से नहीं होती। न्यायाधिकरण ने टिप्पणी की, ''स्व के समर्थन में मौखिक गवाही के अलावा, प्रतिवादी ने किसी अन्य वाहन की संलिप्तता साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया, और न ही आरोपपत्र में ऐसे किसी वाहन के अस्तित्व का उल्लेख है।
एमएसीटी ने मृतक के परिवार को विभिन्न मदों के तहत मुआवजे के रूप में ब्याज सहित करीब 1.56 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की, जिसमें आश्रितों की हानि के तहत 1.11 करोड़ रुपये शामिल हैं। न्यायाधिकरण ने मुआवजे की गणना करते समय इस तथ्य को संज्ञान में लिया कि सेठी नोएडा की एक निजी कंपनी में एसोसिएट प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं और पिता की मृत्यु के बाद मां और बहन दोनों आर्थिक रूप से उसपर निर्भर थीं और मुआवजे की हकदार हैं। एमएसीटी ने कहा कि चूंकि दुर्घटना में संलिप्त वाहन का बीमा था, इसलिए बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर पूरी मुआवजा राशि देने के लिए उत्तरदायी है।