बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में 65 वर्षीय बुजुर्ग को मौत की सजा, अदालत ने कहा- ये दुर्लभतम अपराध

Edited By Updated: 29 Jun, 2026 03:19 PM

a 65 year old man has been sentenced to death for the rape and murder of a minor

पुणे की एक विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में सोमवार को 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई। इस घटना के बाद महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।

नेशनल डेस्क: पुणे की एक विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में सोमवार को 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई। इस घटना के बाद महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। अतिरिक्त न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. सालुंखे ने इस मामले को ''दुर्लभ से दुर्लभतम'' करार देते हुए भीमराव कांबले को सजा सुनाई, जो उस समय कठघरे में मौजूद था। जैसे ही न्यायाधीश ने मौत की सजा सुनाई, बच्ची का परिवार अदालत कक्ष में रो पड़ा। अपने फैसले के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए न्यायाधीश सालुंखे ने कहा कि अभियोजन के पक्ष में काफी मजबूत साक्ष्य मिले हैं।

आरोपी का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर रहा 
अदालत ने टिप्पणी की, ''यह अपराध एक ऐसे आरोपी द्वारा हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने से संबंधित है, जिसका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गंभीर हमलों का एक लंबा इतिहास रहा है।'' अदालत ने एक मई को हुई इस आपराधिक घटना के साठ दिन के भीतर 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया था। यह घटना एक मई को अपराह्न तीन बजे से चार बजे के बीच हुई थी। 

पहले यौन शोषण किया फिर हत्या की 
आरोप है कि कांबले पुणे जिले के नसरापुर गांव में बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची का यौन शोषण किया और फिर उसका मुंह दबाकर व छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी थी। 

 यह अपराध बेहद जघन्य- न्यायाधीश सालुंखे 
न्यायाधीश सालुंखे ने कहा, ''यह अपराध बेहद जघन्य तरीके से किया गया और पीड़िता को यातनाएं दी गईं तथा मानवीय व्यवहार किया गया। पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी। उसकी हत्या केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए की गई, जो आरोपी की विकृत मानसिकता और नैतिक पतन को दर्शाती है। यह बिना किसी उकसावे के की गई सुनियोजित और निर्मम हत्या थी।

ये अपराध अंतरात्मा को भी झकझोर देने वाला 
अपराध को जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया, उसने न केवल न्यायपालिका की अंतरात्मा, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर दिया है।'' अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई भी राहत की गुंजाइश नहीं है। न्यायाधीश ने कहा, ''एकमात्र परिस्थिति जो सामने रखी जा सकती थी, वह थी आरोपी की उम्र, जो 65 वर्ष है। मेरे अनुसार, इसे राहत देने वाला कारक नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, यह अपराध की गंभीरता को और बढ़ाने वाला है।
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!