Edited By Rohini Oberoi,Updated: 09 Feb, 2026 11:35 AM

आगामी 16 से 20 फरवरी तक प्रगति मैदान के भारत मंडपम में होने जा रहा ‘भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ न केवल तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है बल्कि दिल्ली के होटल बाजार में भी आग लगा चुका है। आलम यह है कि राजधानी के फाइव-स्टार होटलों के कमरों का...
Hotel Room Prices Hike : अगर आप फरवरी के मध्य में दिल्ली जाने का प्लान बना रहे हैं तो सावधान हो जाइए! देश की राजधानी में ठहरना अब मिडिल क्लास क्या अमीरों की जेब पर भी भारी पड़ रहा है। दिल्ली के नामी पांच सितारा होटलों के कमरों का किराया आसमान छू रहा है। कुछ होटलों में तो एक रात का बिल किसी लग्जरी कार की कीमत के बराबर पहुंच गया है।
वजह: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026
इस बेतहाशा महंगाई के पीछे कोई शादी या त्यौहार नहीं बल्कि 16 से 20 फरवरी के बीच आयोजित होने वाला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 है। भारत मंडपम में होने वाले इस कार्यक्रम के लिए 35,000 से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, 20 राष्ट्राध्यक्ष और दर्जनों वैश्विक कंपनियों के सीईओ (CEOs) इस दौरान दिल्ली में ही रहेंगे।

बिल देखकर चकरा जाएगा सिर (16-20 फरवरी के रेट्स)
रिपोर्ट और ट्रैवल पोर्टल्स के मुताबिक किरायों में 30% से 50% तक का उछाल आया है:
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इम्पीरियल होटल: यहां एक रात का बेस फेयर करीब ₹1.97 लाख है जो टैक्स मिलाकर ₹2,32,518 तक पहुंच जाता है।
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लीला पैलेस: यहां ठहरने के लिए आपको एक रात के लगभग ₹78,000 चुकाने होंगे।
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हयात रीजेंसी: यहां का किराया भी ₹50,000 प्रति रात के स्तर को छू रहा है।
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शांगरी-ला: 18 फरवरी के लिए यह होटल अभी से पूरी तरह बुक (Sold Out) हो चुका है।

इंटरनेशनल डेलिगेट्स की पहली पसंद सुइट्स
द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के अनुसार 19 और 20 फरवरी की तारीखों के लिए लगभग सभी कमरे बुक हो चुके हैं। विदेशी मेहमानों और मंत्रियों की आमद के कारण प्रीमियम सुइट्स की डिमांड सबसे ज्यादा है। होटल मैनेजर्स का कहना है कि इतने बड़े स्तर का अंतरराष्ट्रीय आयोजन होटल इंडस्ट्री के लिए बोनस जैसा है लेकिन सामान्य यात्रियों के लिए जगह मिलना मुश्किल हो गया है।

इंडस्ट्री का विश्लेषण
विशेषज्ञों के अनुसार जब भी राजधानी में कोई जी-20 जैसा बड़ा ग्लोबल समिट होता है तो मांग और आपूर्ति का संतुलन बदल जाता है। 100 देशों की मौजूदगी और 40 से ज्यादा बड़ी कंपनियों के जुड़ाव ने दिल्ली को नो-वैकेंसी ज़ोन में तब्दील कर दिया है।