Edited By Mansa Devi,Updated: 22 Feb, 2026 11:59 AM

बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल हमलों पर रोक लगाने के लिए भारती एयरटेल ने बड़ी पहल की है। कंपनी ने कैलिफोर्निया स्थित एआई सिक्योरिटी कंपनी Zscaler के साथ साझेदारी का ऐलान किया है।
नेशनल डेस्क: बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल हमलों पर रोक लगाने के लिए भारती एयरटेल ने बड़ी पहल की है। कंपनी ने कैलिफोर्निया स्थित एआई सिक्योरिटी कंपनी Zscaler के साथ साझेदारी का ऐलान किया है।
इस सहयोग के तहत भारत में एक AI और साइबर थ्रेट रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यूजर्स और संस्थानों को एडवांस साइबर हमलों से सुरक्षित करना है। यह घोषणा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान की गई, जहां एयरटेल ने अपने एआई थ्रेट मॉडल को भी पेश किया। कंपनी के अनुसार, यह एक मल्टी-स्टेकहोल्डर डिजिटल पहल होगी, जिसके जरिए देश की साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया जाएगा।
कई सेक्टर को मिलेगा सुरक्षा कवच
एयरटेल का कहना है कि यह रिसर्च सेंटर टेलीकॉम, बैंकिंग, ऊर्जा, सरकारी संस्थानों और आम डिजिटल यूजर्स को साइबर खतरों से बचाने पर काम करेगा। इसका लक्ष्य भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े डिजिटल सिस्टम को मजबूत करना है।
अमेरिकी रिसर्च टीम करेगी सहयोग
Zscaler की रिसर्च यूनिट ThreatLabz India हर महीने लाखों साइबर घुसपैठ की कोशिशों का विश्लेषण करती है। कंपनी के मुताबिक हाल ही में भारत के पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर पर करीब 12 लाख इंट्रूजन अटेम्प्ट दर्ज किए गए, जो लगभग 20 हजार अलग-अलग स्रोतों से किए गए थे और 58 भारतीय डिजिटल संस्थानों को निशाना बनाया गया था।
एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट गोपाल विट्ठल ने कहा कि यह रिसर्च सेंटर लोगों को सुरक्षित तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने में मदद करेगा। वहीं Zscaler के CEO जय चौधरी के अनुसार, इससे भारत को मजबूत सिक्योरिटी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जो साइबर हमलों को पहले ही रोकने में सक्षम होगा।
पहले से सक्रिय है AI डिटेक्शन सिस्टम
एयरटेल पहले ही कॉल और मैसेज के जरिए होने वाले साइबर अपराध को रोकने के लिए अपने नेटवर्क में एआई आधारित डिटेक्शन टूल लागू कर चुका है। यह सिस्टम संदिग्ध कॉल और फर्जी मैसेज को पहचानकर यूजर्स को पहले ही स्पैम अलर्ट देता है। बाद में अन्य टेलीकॉम कंपनियों ने भी इसी तरह की तकनीक अपनानी शुरू कर दी है। कंपनी का दावा है कि नेटवर्क स्तर पर ही साइबर धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में यह कदम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम साबित होगा।