गगनयान मिशन में ISRO की बड़ी छलांग: 'SOLVE' रॉकेट मोटर का पहला टेस्ट सफल

Edited By Updated: 05 Jul, 2026 12:45 PM

gaganyaan mission isro conducts first successful test of solv rocket motor

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान' की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ‘सॉल्व' (सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स) के ठोस ईंधन (सॉलिड मोटर) वाले रॉकेट का पहला सफल परीक्षण किया है।...

ISRO Gaganyaan SOLVE Test : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान' की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ‘सॉल्व' (सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स) के ठोस ईंधन (सॉलिड मोटर) वाले रॉकेट का पहला सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण का उद्देश्य गगनयान के क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी की जांच करना है। 

इसरो ने बताया कि यह परीक्षण तीन जुलाई को सुबह 10 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में किया गया। परीक्षण के दौरान मोटर का प्रदर्शन निर्धारित मानकों के अनुरूप रहा। इसरो ने बताया कि ‘सॉल्व' एक विशेष परीक्षण रॉकेट है जिसके  गगनयान मिशन से पहले अलग-अलग परिस्थितियों में क्रू मॉड्यूल की सुरक्षा प्रणाली की जांच के लिए विकसित किया गया है। 

इन परीक्षणों के दौरान क्रू मॉड्यूल को लगभग 10 से 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया जाएगा। इसके बाद इसे रॉकेट से अलग किया जाएगा और उसकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए क्रमवार 10 पैराशूट खोले जाएंगे जिससे उसकी गति कम होकर वह सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरे। इसरो के अनुसार ‘सॉल्व' का ठोस ईंधन वाला चरण पीएसएलवी रॉकेट के स्ट्रैप-ऑन मोटर पर आधारित है लेकिन गगनयान मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार इसमें कई तकनीकी बदलाव किये गये हैं। 

यह भी पढ़ें: Heavy Rain Alert: आज दिल्ली-UP समेत इन 13 राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश मचाएंगे तांडव, IMD ने जारी किया अलर्ट

इनमें धीमी गति से जलने वाले प्रणोदक और दिशा नियंत्रण प्रणाली में सुधार शामिल हैं। गगनयान मिशन के तहत दो से तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर ऊंची पृथ्वी की कक्षा में तीन दिन के मिशन पर भेजा जाएगा और इसके बाद उन्हें सुरक्षित रूप से भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जायेगा। क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल इस मिशन के अंतरिक्ष यान में मुख्य रूप से दो हिस्से होंगे। क्रू मॉड्यूल वह हिस्सा है जिसमें अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे। 

इसरो ने कहा कि गगनयान परियोजना को देश की वैज्ञानिक क्षमता, भारतीय उद्योग, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों की विशेषज्ञता तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध उन्नत तकनीकों के सहयोग से पूरा किया जा रहा है। इस मिशन से पहले कई महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया जा रहा है। इनमें अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान, अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा वातावरण उपलब्ध कराने वाली जीवन समर्थन प्रणाली, आपात स्थिति में क्रू को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था तथा प्रशिक्षण, बचाव और पुनर्वास से जुड़ी प्रणालियां शामिल हैं। 

यह भी पढ़ें: आपत्तिजनक हालत में 7 युवतियां और 10 युवक, होटलों के अंदर चल रहा था गंदा काम, जैसे ही दरवाज़ा खुला...

इन तकनीकों की विश्वसनीयता परखने के लिए इसरो कई परीक्षण मिशन संचालित करेगा। इनमें इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी), पैड एबॉटर् टेस्ट (पीएटी) और टेस्ट व्हीकल (टीवी) उड़ानें शामिल हैं। मानव मिशन से पहले सभी प्रणालियों का परीक्षण मानवरहित उड़ानों में किया जाएगा। 

इसरो ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए एलवीएम-3 रॉकेट का उपयोग किया जाएगा जिसे मानव मिशन की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित कर ‘ह्यूमन रेटेड एलवीएम-3'(एचएलवीएम-3) बनाया गया है। इसमें एक विशेष ‘क्रू एस्केप सिस्टम' भी लगाया गया है जो प्रक्षेपण के दौरान किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित दूरी तक ले जाने में सक्षम होगा। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!