Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Jul, 2026 09:58 AM
Oral Cancer/Ultrasound Therapy: भारत में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) सबसे आम और गंभीर कैंसरों में गिना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। मौजूदा इलाज जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कई बार कैंसर के साथ-साथ...
Oral Cancer/Ultrasound Therapy: भारत में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) सबसे आम और गंभीर कैंसरों में गिना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। मौजूदा इलाज जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कई बार कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ ऊतकों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक दर्द, बोलने और खाने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इसी चुनौती को देखते हुए Indian Institute of Science (IISc) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक पर शोध किया है, जिसमें Low Frequency Ultrasound की मदद से केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई। शुरुआती लैब परीक्षणों में इस तकनीक ने काफी सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।
क्यों कमजोर होती हैं Oral Cancer Cells?
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि सामान्य और कैंसर कोशिकाओं की बनावट एक जैसी नहीं होती। स्वस्थ कोशिकाओं के अंदर Tropomyosin 2.1 नाम का एक महत्वपूर्ण प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है। यह प्रोटीन कोशिकाओं को बाहरी दबाव और कंपन जैसी परिस्थितियों को सहने की क्षमता देता है। वहीं ओरल कैंसर कोशिकाओं में इस प्रोटीन की मात्रा काफी कम होती है। यही कारण है कि जब इन कोशिकाओं पर कम तीव्रता वाली अल्ट्रासाउंड तरंगें डाली गईं तो वे उस यांत्रिक दबाव को सहन नहीं कर सकीं और उनकी संरचना टूटने लगी। दूसरी ओर स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका बहुत कम असर देखा गया। यानी यह तकनीक शरीर की सामान्य कोशिकाओं को बचाते हुए केवल कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रख सकती है।
Tumor की सुरक्षा परत भी हुई कमजोर
किसी भी कैंसर ट्यूमर के आसपास एक मजबूत Extracellular Matrix (ECM) मौजूद रहती है। यह परत कैंसर को सुरक्षा देती है और कई बार दवाओं को ट्यूमर के अंदर तक पहुंचने से रोकती है। यही वजह है कि कई मरीजों में इलाज का असर सीमित रह जाता है।
स्टडी में पाया गया कि Low Frequency Ultrasound इस सुरक्षा परत को भी कमजोर कर सकती है। इससे ट्यूमर की कठोर संरचना ढीली होने लगती है और उसके अंदर दवाओं के पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि भविष्य में इस तकनीक को कीमोथेरेपी के साथ जोड़ा जाए तो दवाएं अधिक प्रभावी ढंग से कैंसर तक पहुंच सकती हैं।
कैंसर फैलने की गति भी हो सकती है कम
अध्ययन के दौरान यह भी देखा गया कि अल्ट्रासाउंड के बाद कैंसर कोशिकाओं की एक जगह से दूसरी जगह फैलने और आसपास के ऊतकों में प्रवेश करने की क्षमता कम हो गई। इसका मतलब यह है कि यह तकनीक केवल कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्यूमर के फैलाव को रोकने में भी मददगार साबित हो सकती है।
Patient Samples पर किया गया टेस्ट
इस रिसर्च की खास बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने केवल लैब में तैयार सेल लाइनों पर निर्भर रहने के बजाय मरीजों से प्राप्त वास्तविक ट्यूमर सैंपल का उपयोग किया। यह कार्य MS Ramaiah Medical College and Hospitals के डॉक्टरों के सहयोग से किया गया। अलग-अलग मरीजों के नमूनों पर लगभग एक जैसे परिणाम देखने को मिले। अधिकांश मामलों में कैंसर कोशिकाएं अल्ट्रासाउंड के प्रति संवेदनशील रहीं, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। इससे शोध की विश्वसनीयता और भविष्य में इसके क्लिनिकल उपयोग की संभावना मजबूत होती है।
मौजूदा इलाज से कैसे अलग है यह तकनीक?
आज ओरल कैंसर के इलाज में सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी सबसे अधिक इस्तेमाल होती हैं। लेकिन इन तरीकों से कई बार स्वस्थ ऊतक भी प्रभावित हो जाते हैं। Low Frequency Ultrasound Therapy की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। यह तकनीक गर्मी पैदा किए बिना केवल यांत्रिक कंपन के माध्यम से काम करती है। यदि भविष्य में यह सफल होती है तो मरीजों को अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने की जरूरत भी कम पड़ सकती है और इलाज बार-बार सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह तकनीक अभी शुरुआती शोध चरण में है। अगले चरण में वैज्ञानिक इसे पशु मॉडल (Animal Studies) पर परखेंगे ताकि यह समझा जा सके कि जीवित शरीर में रक्त संचार, प्रतिरक्षा प्रणाली और अन्य अंगों के साथ इसका व्यवहार कैसा रहता है। इसके बाद यदि परिणाम सुरक्षित और प्रभावी रहे तो मानवों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू किए जा सकते हैं। शोधकर्ता यह भी जांचना चाहते हैं कि क्या इस तकनीक का उपयोग केवल ओरल कैंसर ही नहीं बल्कि Breast Cancer और Skin Cancer जैसे शरीर के बाहरी हिस्सों में होने वाले अन्य कैंसर के इलाज में भी किया जा सकता है।
क्या यह इलाज अभी उपलब्ध है?
नहीं। यह तकनीक अभी शोध और प्रीक्लिनिकल चरण में है। अभी इसे अस्पतालों में नियमित इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। यदि आने वाले वर्षों में क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं और नियामक संस्थाओं से मंजूरी मिलती है, तभी इसे मरीजों के उपचार में शामिल किया जाएगा।
Q1. Ultrasound केवल कैंसर सेल्स को ही कैसे नुकसान पहुंचाता है?
कैंसर कोशिकाओं में Tropomyosin 2.1 प्रोटीन की कमी होती है, जिससे वे यांत्रिक दबाव को सहन नहीं कर पातीं। Low Frequency Ultrasound का कंपन उन्हें नुकसान पहुंचाता है, जबकि स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं।
Q2. क्या इससे कीमोथेरेपी ज्यादा असरदार बन सकती है?
शोध के अनुसार अल्ट्रासाउंड ट्यूमर के आसपास मौजूद सुरक्षा परत (Extracellular Matrix) को कमजोर कर सकती है। इससे भविष्य में कीमोथेरेपी की दवाएं ट्यूमर के अंदर अधिक आसानी से पहुंच सकती हैं।
Q3. क्या यह इलाज अभी मरीजों के लिए उपलब्ध है?
नहीं। यह तकनीक अभी रिसर्च और प्रीक्लिनिकल स्टेज में है। इसे आम मरीजों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले क्लिनिकल ट्रायल और नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह न माना जाए। किसी भी उपचार या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।