Edited By Ramkesh,Updated: 17 Sep, 2026 06:58 PM

UPI ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगाने को लेकर उपभोक्ता एंव दुकानदार दोनो इस समय टेंशन में है। सरकार जहां एक प्रकार से इसे अर्निवार्य बता रही है तो विपक्ष इसे उपभोक्ताओं से जबरन वसूली बता रहा है। इसी बीच नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिरी ने बड़ा...
नई दिल्ली: UPI ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगाने को लेकर उपभोक्ता एंव दुकानदार दोनो इस समय टेंशन में है। सरकार जहां एक प्रकार से इसे अर्निवार्य बता रही है तो विपक्ष इसे उपभोक्ताओं से जबरन वसूली बता रहा है। इसी बीच नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिरी ने बड़ा बयान दिया है। एक निजी चैनल के मुताबिक उन्होंने कहा कि बड़े ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मामूली चार्ज की तुलना चेकबुक जैसी अन्य बैंकिंग सेवाओं से की। उन्होंने कहा, “आंकड़ों को देखिए। 100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर आपको सिर्फ 40 पैसे देने हैं, वह भी केवल बड़े लेन-देन पर। इससे धीरे- धीरे आप को आदत पड़ जाएगी।
नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिरी ने UPI ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट चार्ज लगाने के सरकार के फ़ैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार को बिना सब्सिडी दिए कारोबार को बनाए रखने के तरीके खोजने होंगे। प्राचीन भारतीय शिक्षक और दार्शनिक चाणक्य का ज़िक्र करते हुए - जिन्होंने कहा था कि शासक को नागरिकों से वैसे ही टैक्स लेना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूल से शहद लेती है - धीरे-धीरे, बिना दर्द पहुंचाए या पंखुड़ियों को नुकसान पहुंचाए - लाहिरी ने कहा, "इसलिए आपको बिना सब्सिडी दिए कारोबार को बनाए रखने के तरीके खोजने होंगे।
लाहिरी ने एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा, "100 रुपये के आंकड़े को देखिए। आप 100 रुपये के ट्रांज़ैक्शन के लिए 40 पैसे देते हैं। वह भी बड़े ट्रांज़ैक्शन पर... क्या इससे आप पर बहुत बोझ पड़ेगा? नहीं, लेकिन आपको कारोबार को खुद से चलने लायक (सेल्फ़-सस्टेनेबल) आधार पर चलाना होगा।
लगभग छह साल तक पूरी तरह से मुफ़्त UPI पेमेंट की सुविधा के बाद, सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि 15 अक्टूबर से UPI के ज़रिए मर्चेंट को 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांसफ़र पर 0.4 प्रतिशत फ़ीस लगेगी। साथ ही, आम लोगों के बीच होने वाले रोज़मर्रा के ट्रांज़ैक्शन और छोटे पेमेंट को किसी भी चार्ज से अलग रखा गया है। उन्होंने समझाया, "आपको इसकी आदत हो जाएगी। उदाहरण के लिए, चेक बुक - जब आप इसे बैंकों से लेते हैं, तो आप इसके लिए थोड़ी रकम देते हैं। क्या इससे बुरा लगता है? यह कारोबार का हिस्सा है।
MDR लगाने के फ़ैसले का व्यापारियों, दुकानदारों और राजनीतिक दलों सहित कई लोगों ने कड़ा विरोध किया है और इस कदम को 'मोदी टैक्स' का नाम दिया है। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को कहा कि MDR लगाने का फ़ैसला UPI इकोसिस्टम के बड़े हित में और इसकी सुरक्षा और मज़बूती के लिए लिया गया था।