राम मंदिर दान चोरी केस: आरोपी का बड़ा खुलासा, बाथरूम में छिपाए जाते थे करोड़ों रुपये

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 09:44 AM

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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से एक ने कथित तौर पर खुलासा किया है कि चोरी का पैसा बाहर ले जाने से पहले कुछ समय के लिए वॉशरूम में छिपाया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसने पकड़े जाने से बचने के तरीके और दान की...

नेशनल डेस्क: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से एक ने कथित तौर पर खुलासा किया है कि चोरी का पैसा बाहर ले जाने से पहले कुछ समय के लिए वॉशरूम में छिपाया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसने पकड़े जाने से बचने के तरीके और दान की गिनती की व्यवस्था में कमियों के बारे में भी जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि अदालत से इजाज़त मिलने के बाद पुलिस ने मंगलवार को अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उसने करोड़ों रुपये की चोरी की बात कबूल की और घटनाक्रम के बारे में बताया।
 
पूछताछ के दौरान मंदिर के ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर से सामने आया। आरोपी ने दावा किया कि दान की गिनती की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका थी।मंदिर में दान के प्रबंधन और निगरानी के तरीकों पर बढ़ती जांच के बीच, मिश्रा और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था। शुक्ला के अलावा, इस मामले में गिरफ्तार अन्य सात लोगों में रामाशंकर उर्फ ​​टिन्नू यादव (जिन्हें चंपत राय का करीबी सहयोगी बताया जाता है), गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और गिनती करने वाले कर्मचारी अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, राम शंकर मिश्रा और करुणेश पांडे शामिल हैं।

 सूत्रों के मुताबिक, अविनाश शुक्ला ने पुलिस को बताया कि दान की गिनती वाले कमरे की एक चाबी टिन्नू यादव के पास थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास थी। उसने दावा किया कि चोरी कई लोगों के आपसी तालमेल से की गई थी। एक व्यक्ति पैसे लेता था, जबकि बाकी लोग कथित तौर पर उसके चारों ओर घेरा बनाकर उसे छिपाते थे। जांचकर्ताओं को बताया गया कि सभी आरोपियों को परिसर के अंदर लगे कैमरों की जगह के बारे में पता था। उन्होंने कथित तौर पर इस जानकारी का इस्तेमाल पकड़े जाने से बचने के लिए किया और पैसे को बाथरूम जैसी जगहों पर छिपा दिया, ताकि मौका मिलने पर उसे बाद में निकाला जा सके। शुक्ला ने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के करीबी होने की वजह से उन पर कम शक किया जाता था और उन पर कड़ी नज़र नहीं रखी जाती थी।

निगरानी प्रणाली और पैसे का पता लगाना
आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि मंदिर परिसर के अंदर लगे कैमरों की निगरानी एक कंट्रोल रूम से की जाती थी, लेकिन निगरानी करने वाले कर्मचारी उनकी गतिविधियों पर सक्रिय रूप से नज़र नहीं रखते थे।

इस बीच, शुक्ला के कबूलनामे के मुताबिक, चोरी के पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर ज़मीन और घर खरीदने में किया गया था। पुलिस अब जांच के हिस्से के तौर पर आरोपियों से जुड़ी वित्तीय जानकारी और संपत्ति की जांच कर रही है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि कथित चोरी का सिलसिला बिना पकड़े गए कितने समय तक चलता रहा और क्या इसमें और भी लोग शामिल थे।

SIT जांच से पहले ही 58 लाख रुपये बरामद
चोरी के आरोपों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए 13 जून को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। हालांकि, इस हफ़्ते की शुरुआत में यह पता चला कि ट्रस्ट ने 5 जून को ही अविनाश शुक्ला के घर से 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे, जो इस मामले में FIR दर्ज होने से पहले की बात है। इस बीच, बाकी पैसे 5 से 8 जून के बीच बैंक ट्रांसफ़र के ज़रिए लौटा दिए गए। इससे पता चलता है कि गबन किए गए पैसे को वापस पाने की कोशिशें मामले के औपचारिक रूप से कानूनी प्रक्रिया में आने से पहले ही शुरू हो गई थीं।

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