Edited By Pardeep,Updated: 08 Jul, 2026 11:30 PM

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की कथित चोरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर याचिका पर 13 जुलाई को सुनवाई कर सकता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण...
नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की कथित चोरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर याचिका पर 13 जुलाई को सुनवाई कर सकता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा जाए और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।
अवकाशकालीन बेंच ने तत्काल हस्तक्षेप से किया था इनकार
इससे पहले 29 जून को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने इस मामले में तुरंत दखल देने से मना कर दिया था। अदालत का रुख था कि गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित बेंच ही इस मामले को सुनेगी। अब चूंकि 13 जुलाई से कोर्ट की नियमित कार्यवाही शुरू हो रही है, सिस्टम जेनरेटेड स्टेटस के अनुसार इस मामले के सूचीबद्ध होने की पूरी संभावना है, हालांकि आधिकारिक सूची का अभी इंतजार है।
SIT रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, अविनाश शुक्ला मुख्य आरोपी
इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अविनाश शुक्ला इस पूरी चंदा चोरी का मुख्य आरोपी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि मंदिर में दान की रकम की गिनती के दौरान लगभग 40 दिनों तक यह खेल चला, जिसमें चोरी के करीब 70 मामले सामने आए हैं। शुक्ला की निशानदेही पर ही पुलिस ने पांच अन्य आरोपियों की पहचान की है और दान राशि गणना कक्ष के भीतर संदिग्ध कार्यप्रणाली का पर्दाफाश किया है।
कमाई कम, बैंक खातों में लाखों का खेल
एसआईटी की जांच में एक और बड़ी बात सामने आई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दान राशि की गिनती के लिए रखे गए कर्मियों को मात्र 15 हजार रुपये प्रति माह के आसपास वेतन मिलता है। लेकिन, आरोपी अविनाश शुक्ला की बैंकिंग गतिविधियों की जांच करने पर पाया गया कि उसके खातों में जमा रकम उसकी ज्ञात आमदनी से कहीं ज्यादा थी। फिलहाल, सबकी नजरें 13 जुलाई को होने वाली संभावित सुनवाई पर टिकी हैं।