अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: चंपत राय-अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दिया, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 02:29 PM

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में अध्यक्ष चंपत राय-अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। आप को बता दें कि इस मामले में पुलिस ने नामजद आठों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को इसकी...

नेशनल डेस्क: अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में अध्यक्ष चंपत राय-अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। आरोपी टिन्नू और सुभाष ने पूछताछ में कई बैंक अधिकारियों के नाम लिए है। आप को बता दें कि इस मामले में पुलिस ने नामजद आठों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की।

आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज 
पुलिस सूत्रों ने बताया कि विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी आरोपियों की न्यायिक रिमांड लेने के लिए उन्हें फैजाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में पेश किया जाएगा। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर ने बताया कि आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और पुलिस मामले के संबंध में उनसे पूछताछ कर रही है। ग्रोवर ने कहा कि पुलिस पूछताछ के बाद उन्हें अदालत के समक्ष पेश करेगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में बृहस्पतिवार को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से 23 जून को सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया है।

सीएम बोले- एसआईटी की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' होकर रहेगा
सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से 'दूध का दूध और पानी का पानी' होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव सहित आठ पर केस दर्ज 
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को सात जून को एक खबर का हवाला देते हुए उठाया और उन्होंने इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। बाद में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306 (मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की लिपिक या नौकर द्वारा चोरी), 316 (आपराधिक विश्वासघात), 317 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत, अन्य प्रावधानों के साथ दर्ज किया गया है। खबरों के अनुसार, सुभाष श्रीवास्तव नकदी गिनने वाले कर्मचारियों के प्रभारी थे, जबकि अन्य आरोपी नकदी या कीमती सामान गिनने में शामिल थे या अलग-अलग भूमिकाओं में इस प्रक्रिया से जुड़े थे। प्राथमिकी में नामजद रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव के बारे में बताया गया है कि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पहले वाहन चालक रहा है। विवाद शुरू होने के बाद, टिन्नू ने पैसे गिनने में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया और इन आरोपों के लिए अज्ञात "ईर्ष्यालु लोगों" को जिम्मेदार ठहराया।

एसआईटी की रिपोर्ट के अधार पर हुई कार्रवाई 
मंदिर में दान के तौर पर मिले नकद रुपयों और कीमती सामान को गिनने में लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा समेत अन्य आरोपी भी शामिल रहे हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया के लिए संपर्क का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। तीन सदस्यीय एसआईटी की अगुवाई लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने इस हफ्ते की शुरुआत में राज्य सरकार को सौंपी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में "मजबूत और सख्त" कार्रवाई की सिफारिश की है। 


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को लेकर "बहुत गंभीर" हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विश्व हिंदू परिषद और आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। कुछ विपक्षी नेताओं ने प्राथमिकी को "दिखावा" करार दिया है। उनका आरोप है कि इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों - जिनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं, की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
 

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