Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: जीवन के हर संकट को हर लेंगे बप्पा, जानें व्रत की सही तिथि और पूजा के नियम

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 01:33 PM

krishnapingala sankashti chaturthi 2026

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: जानें, साल 2026 में कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी कब है? भगवान गणेश की पूजा के नियम, शुभ मुहूर्त और व्रत की सही विधि के साथ क्या करें और क्या न करें की पूरी जानकारी।

Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है और उनकी कृपा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद फलदायी होता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से गणेश जी के 'कृष्णपिंगल' स्वरूप की पूजा करने से भक्तों के बड़े से बड़े बिगड़े काम बन जाते हैं और जीवन से नकारात्मकता दूर होती है।

संकष्टी के दिन गणपति की पूजा करने से घर से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और शांति बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी घर में आ रही सारी विपदाओं को दूर करते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है।

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कब है कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026? 
साल 2026 में यह पावन व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा।
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 3 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 20 मिनट से।
चतुर्थी तिथि का समापन: 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत तिथि: उदया तिथि और चंद्रोदय व्यापिनी मुहूर्त के अनुसार, 3 जुलाई को ही व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा।

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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
गणेश चतुर्थी पर गणपति जी का पूजन और उपासना करने से घर में सम्पन्नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है तो आईए जानें कैसे करें कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की पूजा :-

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मूहर्त में उठकर स्नान आदि से शुद्ध होकर स्वच्छ कपड़े पहनें। आज के दिन लाल अथवा पीले रंग के वस्त्र पहनना अति शुभ होता है।

गणपति का पूजन शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें।

पंचामृत से श्री गणेश को स्नान कराएं तत्पश्चात केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा और आरती करें।  उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं।

श्री गणेश जी का श्री स्वरूप ईशाण कोण में स्थापित करें और उनका श्री मुख पश्चिम की ओर रहे।

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कृष्णपिंगल संकष्टी व्रत में क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:

गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेश जी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।

गणेश जी को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।

गणपति के सामने धूप-दीप जला कर इस मन्त्र का जाप करें- गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।

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क्या न करें:
सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन सामर्थ्य हो तो सेंधा नमक नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करें।
पूजा के बाद फल, मूंगफली, खीर, दूध या साबूदाने को छोड़कर कुछ भी नहीं खाना चाहिए।
घर में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल न करें।
जुआ न खेलें।
निंदा, चुगली करने से बचें।  
किसी की बुराई न करें बल्कि उसके सद्गुणों की ओर ध्यान दें।
चोरी करने से इस लोक में ही नहीं परलोक में भी दुख भोगना पड़ता है। इस बुरी आदत से दूर रहें।
हिंसा से दूर रहें, मन में बुरे भाव आते हैं।
संभोग न करें। ब्रह्मचार्य का पालन करें।
क्रोध न करें, संयम से काम लें।
झूठ नहीं बोलना चाहिए। एक झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं।

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