Edited By Niyati Bhandari,Updated: 01 Jul, 2026 02:58 PM

Amarnath Yatra story: अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत 3 जुलाई से हो रही है। जानें महर्षि भृगु से जुड़ी पौराणिक कथा, बाबा बर्फानी के दर्शन के नियम और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया।
Amarnath Yatra 2026 Guide: महादेव के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। साल 2026 की पावन अमरनाथ यात्रा का आगाज 3 जुलाई से होने जा रहा है। दक्षिण कश्मीर के हिमालय में स्थित पवित्र गुफा में विराजित 'बाबा बर्फानी' के दर्शनों के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना पहुंचते हैं। आइए जानते हैं इस यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथा, बाबा बर्फानी के प्रकट होने का रहस्य और श्रद्धालुओं के लिए जारी नई गाइडलाइंस।

श्री अमरनाथ आदिदेव भगवान शंकर की पवित्र उपाधि है । धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में स्थित प्राकृतिक भव्य एवं चमत्कारिक गुफा में प्रत्येक वर्ष हिमशिवलिंग के दर्शन करने से सुखद अनुभव की प्राप्ति होती है । भारत के तीर्थ स्थानों में श्री अमरनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है । कश्मीर के हिमाच्छादित पर्वतों के आगोश में बनी इस पवित्र गुफा के दर्शन हेतु यात्रा जुलाई में प्रारम्भ होकर अगस्त में रक्षाबंधन तक चलती है । अमरनाथ यात्रा को कुछ लोग मोक्ष प्राप्ति का तो कुछ स्वर्ग की प्राप्ति का जरिया बतलाते हैं ।

सबसे पहले किसने किए थे गुफा के दर्शन?
इस पवित्र गुफा के सबसे पहले दर्शन महर्षि भृगु ने किए थे। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब पूरी कश्मीर घाटी जलमग्न थी, तब महर्षि कश्यप ने नदियों के जरिए सारा पानी बाहर निकाला था। उसी दौरान हिमालय भ्रमण पर निकले महर्षि भृगु को एकांत में तपस्या के लिए इस दिव्य गुफा के दर्शन हुए और तभी से अमरनाथ यात्रा की परंपरा शुरू हुई।
प्राचीन कथानुसार इस पावन गुफा की खोज बूटा मलिक नाम के मुसलमान गडरिए ने की थी । एक दिन वह भेड़ें चराते दूर निकल गया जहां उसकी एक साधु से भेंट हुई। साधु ने बूटा मलिक को एक कोयले से भरी कांगड़ी दी । घर जाकर जब उसने देखा तो उस कागड़ी में सोना था जिसे देखकर वह हैरान हो गया । उस साधु का धन्यवाद करने वह वापस उस स्थान पर गया परन्तु साधु उसे मिला नहीं । उसने वहां एक विशाल गुफा देखी । उसी दिन से यह गुफा एक तीर्थ स्थान बन गई। माता पार्वती ने अमरकथा इसी गुफा में सुनी थी।

चमत्कारी है बाबा बर्फानी का स्वरूप
अमरनाथ गुफा में बनने वाले शिवलिंग की महिमा निराली है। यहां शिवलिंग का निर्माण गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदों से होता है। धार्मिक मान्यता है कि यह हिम शिवलिंग चंद्रमा की रोशनी के चक्र के अनुसार घटता और बढ़ता रहता है। बर्फ से बने इसी अद्भुत स्वरूप के कारण श्रद्धालु इन्हें प्रेम से 'बाबा बर्फानी' पुकारते हैं।
अमरनाथ यात्रा के लिए आयु सीमा और पंजीकरण
अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु की उम्र 13 से 70 साल के बीच होना अनिवार्य है।
आधिकारिक वेबसाइट jkasb.nic.in पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं, तभी आप बाबा बर्फानी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
यात्रा पर जाते समय 'अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र' (CHC), यात्रा पंजीकरण पर्ची और आधार कार्ड जैसा वैध पहचान पत्र अपने साथ रखना अनिवार्य होता है।
श्रद्धालु इन बातों का रखें विशेष ध्यान
यात्रा के दौरान हर अंतराल के बाद विश्राम अवश्य करें।
यदि आपको ऊंचाई वाली यात्रा में पहले कोई समस्या आ चुकी है तो यात्रा शुरू करने से पहले चिकित्सक से जांच करवाएं।
यात्रा दौरान ऊंचाई पर धीमे चलें और बीच-बीच में सांस लेने के लिए रुकें।
नीचे आते वक्त तेजी से चलें और बीच-बीच में रुकते रहें।
यात्रा दौरान समस्या होने पर दवा लेने से पहले अपने डाक्टर से सम्पर्क कर सलाह अवश्य लें।
यात्रा दौरान खूब पानी पीएं, इससे सिरदर्द नहीं होगा।
बीमार होने की स्थिति में किसी भी यात्री द्वारा दी गई मैडीकल सलाह न मानें।
यात्रा के दौरान खाने-पीने का ध्यान रखें और श्राइन बोर्ड द्वारा सुझाए गए डाइट चार्ट को फॉलो करें।
