सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर लगा बैन, FSSAI का बड़ा फैसला

Edited By Updated: 19 Apr, 2026 12:08 PM

ban imposed on the use of ashwagandha leaves in supplements

FSSAI ने स्वास्थ्य जोखिमों के चलते सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा की पत्तियों और उनके एक्सट्रैक्ट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है।

नेशनल डेस्क: भारत के खाद्य नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा की पत्तियों के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार ने केवल इसकी 'जड़ों' के उपयोग को मंजूरी दी है। आयुष मंत्रालय की सिफारिशों के बाद जारी आदेश में कहा गया है कि अब से केवल अश्वगंधा की जड़ों (Roots) का ही उपयोग खाद्य उत्पादों और सप्लीमेंट्स में किया जा सकेगा। 

इस वजह से लिया गया निर्णय 

वैज्ञानिक अध्ययनों और आयुष मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, अश्वगंधा की पत्तियों में विथाफेरिन-A (Withaferin-A) जैसे रिएक्टिव विथानोलाइड्स का उच्च सांद्रण (High Concentration) पाया गया है। इसके सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं जैसे लिवर डैमेज, पाचन संबंधी समस्याएं और न्यूरोटॉक्सिसिटी यानी कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी संभावित जटिलताएं। 

मैन्युफैक्चरर्स के लिए सख्त निर्देश 

FSSAI ने 16 अप्रैल को सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ को आदेश जारी कर 'सख्त निगरानी' के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों का कच्चे, एक्सट्रैक्ट या किसी भी अन्य रूप में उपयोग वर्जित है। सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे लेबल पर स्पष्ट रूप से घोषित करें कि पौधे के किस हिस्से (जैसे- जड़) का उपयोग किया गया है। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

उद्योग पर प्रभाव 

भारत की लगभग $38.77 बिलियन की न्यूट्रास्युटिकल्स इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। अश्वगंधा इस बाजार का एक प्रमुख घटक है, जिसका मार्केट 2026 तक $928.5 मिलियन पहुंचने का अनुमान है। उत्तरी अमेरिका और यूरोप में चाय, गमीज़ और कैप्सूल के रूप में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, भारतीय निर्यातकों को अब अपने फॉर्मूलेशन में बड़े बदलाव करने होंगे।

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