Edited By Radhika,Updated: 16 Feb, 2026 05:21 PM

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने सोमवार को राहुल गांधी और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने सुबह करीब आठ बजे अपना त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा था, जिसमें...
नेशनल डेस्क: असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने सोमवार को राहुल गांधी और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने सुबह करीब आठ बजे अपना त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा था, जिसमें उन्होंने पार्टी में अपनी उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया था। उनके त्यागपत्र की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह, पार्टी की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की। बोरा के मनाने के क्रम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनसे फोन पर बात की। जितेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।
उनका कहना था, ''भूपेन जी हमारे बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं। परिवार के अंदर कभी-कभी मनमुटाव हो जाता है। लेकिन यह हमारा आंतरिक मामला है। भूपेन जी ने असम की जनता के लिए लड़ाई लड़ी है और कांग्रेस में लंबा राजनीतिक जीवन बिताया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने उनसे (इस्तीफा वापस लेने) का आग्रह किया, उनकी राहुल गांधी जी से बात हुई, केसी वेणुगोपाल जी से बात हुई। सिंह ने इस बात पर जोर दिया, ''हमारी पार्टी एक लोकतांत्रिक पार्टी है। हम दूसरी पार्टियों की तरह नहीं हैं कि ऊपर से डंडा चलता है और सब चुप हो जाते हैं। यदि कोई विषय होता है तो हम सब आपस में बात करके उसे सुलझाते हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में भूपेन बोरा प्रचार अभियान संभालेंगे। इस बीच, बोरा ने अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा है। गोगोई ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोरा से बात की है और उनका इस्तीफा आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है। गोगोई ने कहा, ''अगर पार्टी में कुछ मुद्दों के कारण भूपेन बोरा को ठेस पहुंची है तो हम उनसे माफी मांगते हैं।''

कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में बोरा ने दावा किया था कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं। इस्तीफे के बाद बोरा ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा था, ''मैंने आज सुबह आठ बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया और विस्तार से बताया कि मुझे यह कदम उठाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है। मैंने पार्टी को 32 साल दिए हैं। मैं 1994 में पार्टी में शामिल हुआ था। यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं है, यह पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है। इसलिए मैंने कांग्रेस आलाकमान को सब कुछ विस्तार से बताया।'' उन्होंने ऐसे समय पर इस्तीफा दिया जब कांग्रेस कुछ विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही है। असम में अगला विधानसभा चुनाव इस वर्ष मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव से पहले किसी अन्य दल में शामिल होने के सवाल पर बोरा ने कहा कि उन्हें अब तक किसी भी पार्टी की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ''किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन यह बात भी है कि मैंने राजनीति को अलविदा कहने के लिए इस्तीफा देने का निर्णय नहीं लिया है।'' बोरा ने बताया कि रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई से कल उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा ''वह कल मुझसे मिले और हमने व्यक्तिगत स्तर पर कई मुद्दों पर चर्चा की।''