राहुल गांधी के भाषण पर फिर चली कैंची, संसदीय रिकॉर्ड से हटाए गए ये शब्द

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 11:49 PM

rahul gandhi s remarks expunged amid uproar in lok sabha

लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर घेरा।

नेशनल डेस्क: लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता देश के दीर्घकालिक हितों के अनुकूल नहीं है और इससे ऊर्जा सुरक्षा, कृषि क्षेत्र, आईटी इंडस्ट्री तथा डेटा संप्रभुता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इस समझौते के तहत भारत की नीतिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में निर्णय लिए जा रहे हैं।

विवादित शब्दों पर हंगामा

भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कुछ विवादास्पद बयान दिए, जिनमें अडानी, अनिल अंबानी, एपस्टीन फाइल्स, sold out, Modi surrendered India, non sense, ashamed, shameful जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इनमें से कई हिस्सों और शब्दों को सदन के रिकॉर्ड से हटा (expunged) दिया गया। सदन में इन बयानों पर भारी हंगामा हुआ, सत्ता पक्ष ने विरोध जताया और लोकसभा अध्यक्ष ने कुछ हिस्सों को असंसदीय करार देते हुए रिकॉर्ड से निकालने का आदेश दिया।

तेल आयात और किसानों का मुद्दा

राहुल गांधी ने दावा किया कि समझौते की शर्तें भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित कर सकती हैं और यह स्थिति पैदा हो सकती है कि भारत को तेल खरीद के फैसलों में बाहरी दबाव झेलना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

सत्ता पक्ष का पलटवार

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि भाषण में कई दावे तथ्यात्मक रूप से गलत और असंसदीय थे, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की गई। सत्ता पक्ष ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और कहा कि सरकार राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।

बढ़ा राजनीतिक तापमान

इस घटनाक्रम के बाद बजट सत्र का माहौल और गरमा गया है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, विदेश नीति और आर्थिक रणनीति अब संसद और सियासत के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।

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