Edited By Tanuja,Updated: 01 Jun, 2026 07:25 PM

ईरान ने कुवैत पर किए गए हमलों की यूरोपीय संघ द्वारा की गई आलोचना को खारिज करते हुए उसे "चुनिंदा नैतिकता" और "पाखंड" करार दिया है। तेहरान का कहना है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल किया, जबकि यूरोपीय संघ ने इसे...
International Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और यूरोपीय संघ के बीच कूटनीतिक टकराव और तेज हो गया है। ईरान ने कुवैत पर किए गए अपने हमलों की यूरोपीय संघ द्वारा की गई निंदा को "पाखंडी" और "गैर-जिम्मेदाराना" करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने आस आलोचना को पाखंड बताते हुए कहा कि ईरान ने केवल उन सैन्य ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाया, जिनका उपयोग उसके खिलाफ अमेरिकी हमले करने के लिए किया जा रहा था।
उनके अनुसार यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा का वैध अधिकार है। किसी भी देश को अपनी भूमि का उपयोग दूसरे देश पर हमले के लिए नहीं होने देना चाहिए। यूरोपीय संघ हमलावरों को बचा रहा है और पीड़ित पक्ष को दोषी ठहरा रहा है। यूरोपीय संघ ने 29 मई को जारी बयान में Kuwait पर ईरानी हमले की कड़ी निंदा की थी। EU के अनुसार हमला कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पैदा हुआ है।सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करना चाहिए। यूरोपीय संघ ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए, जिसमें ईरान से खाड़ी देशों और जॉर्डन पर हमले रोकने का आग्रह किया गया था।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता बढ़ी हुई है। यूरोपीय देश युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं। ईरान अपने सैन्य कदमों को आत्मरक्षा बता रहा है। ईरान और यूरोपीय संघ के बीच यह बयानबाजी दर्शाती है कि मध्य पूर्व संकट पर अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। जहां यूरोप क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून की बात कर रहा है, वहीं ईरान का दावा है कि वह केवल अपने बचाव का अधिकार इस्तेमाल कर रहा है।