पकड़े गए घुसपैठियों को बीएसएफ को सौंपकर देश से बाहर निकाला जाएगा, बंगाल में नियम लागू : शुभेंदु

Edited By Updated: 20 May, 2026 09:58 PM

the apprehended infiltrators will be handed over to the bsf and expelled from th

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक ऐसी व्यवस्था लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को निर्वासन के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही ''पता लगाओ, हटाओ और...

नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक ऐसी व्यवस्था लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को निर्वासन के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही ''पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो'' ढांचे की भी घोषणा की। शुभेंदु के उत्तर बंगाल से लौटने के तुरंत बाद वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित प्रेस वार्ता में की गई इस घोषणा ने घुसपैठ और सीमा प्रबंधन पर नीतिगत रुख में तीखे बदलाव का संकेत दिया, जो लंबे समय से बंगाल में भाजपा के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा है और नयी सरकार के एजेंडे के केंद्र में है।

उन्होंने राज्य सचिवालय 'नबान्न' में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत आने वाले समुदाय नयी व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे, जबकि घुसपैठियों के रूप में पहचाने जाने वाले अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र की ओर से पिछले साल लाए गए उस प्रावधान को लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ को सौंपने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, ''केंद्र सरकार ने पिछले साल 14 मई को राज्य सरकार को घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ को सौंपने के संबंध में पत्र भेजा था, लेकिन पिछली सरकार इस महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू करने में विफल रही। हमने अब इसे लागू कर दिया है।''

शुभेंदु ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने सीएए का विरोध किया और केंद्र द्वारा बनाई गई व्यवस्था को लागू नहीं किया। सीएए के प्रावधानों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के अंतर्गत आने वाले सात समुदाय, जो निर्धारित समयसीमा से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, ''नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत सात समुदायों का नाम लिया गया है और जो लोग 31 दिसंबर 2024 तक आए हैं, उन्हें सुरक्षा प्रदान की गई है तथा पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकती।'' नागरिकता कानून के दायरे में आने वाले समुदायों में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं, जो निर्धारित समयसीमा से पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आ गए थे।

शुभेंदु ने कहा कि अधिनियम के दायरे में न आने वालों को घुसपैठिया माना जाएगा। उन्होंने कहा, ''राज्य पुलिस उन्हें हिरासत में लेगी और बीएसएफ को सौंप देगी।'' शुभेंदु ने कहा कि इसके बाद बीएसएफ बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ समन्वय करके निर्वासन प्रक्रिया शुरू करेगी। उन्होंने कहा, ''बीएसएफ बीजीबी से बात करेगी और घुसपैठियों को निर्वासित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। आज से यह कानून लागू हो रहा है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को पहले ही निर्देश दे दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ''हमने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह सचिव को सूचित कर दिया है कि पश्चिम बंगाल तथा भारत की सुरक्षा के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी थानों में इस कानून को लागू किया जाएगा।'' शुभेंदु ने कहा कि घुसपैठियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी, जो सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा पर सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

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