MS Dhoni/Yuvraj Singh: धोनी ने नहीं निकलवाया युवराज को टीम से बाहर, पूर्व सेलेक्टर का बड़ा खुलासा

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 07:28 AM

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भारतीय क्रिकेट जगत में धोनी बनाम युवराज (योगराज सिंह) का विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पिछले कई सालों से युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जानबूझकर उनके बेटे का करियर खत्म...

Sports News: भारतीय क्रिकेट जगत में धोनी बनाम युवराज (योगराज सिंह) का विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पिछले कई सालों से युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जानबूझकर उनके बेटे का करियर खत्म किया। योगराज का गुस्सा जगजाहिर है और वे सार्वजनिक मंचों पर कई बार कह चुके हैं कि वे धोनी को कभी माफ नहीं करेंगे। लेकिन अब भारत के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने इस पूरी कहानी को एक नया और चौंकाने वाला मोड़ दे दिया है।

पर्दे के पीछे का सच: धोनी ने कभी नहीं की 'ना'
एक हालिया बातचीत में संदीप पाटिल ने उस कमरे के भीतर की हकीकत बयां की जहाँ टीम इंडिया का भविष्य तय होता है। पाटिल ने बेहद साफ शब्दों में और रिकॉर्ड पर यह बात कही कि चयन समिति की बैठकों के दौरान धोनी ने कभी भी युवराज सिंह को टीम से बाहर करने की सिफारिश नहीं की। अक्सर कप्तानों पर अपनी पसंद के खिलाड़ी चुनने का दबाव बनाने के आरोप लगते हैं, लेकिन पाटिल के अनुसार धोनी इसके विपरीत थे। उन्होंने बताया कि धोनी ने हमेशा चयनकर्ताओं के फैसलों का सम्मान किया और कभी भी किसी खिलाड़ी के करियर में 'बाधा' बनने की कोशिश नहीं की।

पिता की भावना बनाम चयन की प्रक्रिया
संदीप पाटिल ने जहाँ धोनी का बचाव किया, वहीं उन्होंने योगराज सिंह के प्रति भी सहानुभूति दिखाई। उनका मानना है कि एक पिता का अपने बेटे के लिए भावुक होना और उसके करियर के प्रति सुरक्षात्मक महसूस करना स्वाभाविक है। हालांकि, भावनाओं से परे हटकर पाटिल ने स्पष्ट किया कि युवराज को टीम से बाहर रखने का फैसला पूरी तरह से चयन समिति का था, न कि कप्तान का व्यक्तिगत निर्णय। पाटिल का यह बयान योगराज सिंह के उन दावों को सीधे तौर पर चुनौती देता है जिसमें धोनी को 'विलेन' की तरह पेश किया जाता रहा है।

युवराज: एक ऐसा योद्धा जिसने खुद अपना रास्ता बनाया
इस पूरे विवाद के बीच युवराज सिंह का कद हमेशा महान खिलाड़ियों में रहेगा। 2007 और 2011 के विश्व कप में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर मैदान पर वापसी करना उनकी जीवटता का प्रमाण था। युवराज ने भारतीय क्रिकेट को जो दिया, उसकी चमक आज भी बरकरार है। लेकिन पाटिल के खुलासे के बाद अब खेल प्रेमियों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई किसी एक व्यक्ति के इशारे पर किसी बड़े खिलाड़ी का करियर रुक सकता है, या फिर टीम का समीकरण और फॉर्म ही असली कारण होते हैं।

संदीप पाटिल की इस सफाई ने धोनी पर लगे 'आरोपों के दाग' धोने की कोशिश की है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या योगराज सिंह इस 'नए सच' को स्वीकार करते हैं या उनकी नाराजगी की जंग यूं ही जारी रहेगी।

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