Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Apr, 2026 03:51 PM

किसी ने सच ही कहा है कि इंसान अपनी मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकता है। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में एक 45 वर्षीय महिला की बहादुरी और उनके परिवार के निस्वार्थ फैसले ने तीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नई जिंदगी दी है। ब्रेन हैमरेज...
Brain Dead Woman Saves Three Lives : किसी ने सच ही कहा है कि इंसान अपनी मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकता है। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में एक 45 वर्षीय महिला की बहादुरी और उनके परिवार के निस्वार्थ फैसले ने तीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नई जिंदगी दी है। ब्रेन हैमरेज के कारण ब्रेन-डेड घोषित होने के बाद इस महिला के दिल, लिवर और किडनी को दान कर दिया गया।
दुख की घड़ी में महादान का फैसला
महिला को गंभीर ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जब डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रेन डेड' (मस्तिष्क का मृत होना) घोषित कर दिया तब क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टरों और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर ने परिवार को अंगदान की महत्ता समझाई। भारी दुख के बावजूद परिवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश करते हुए अंगदान की सहमति दे दी।
कहां-कहां मिले नए जीवन?
राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने तुरंत अंगों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की:
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किडनी: एक किडनी दिल्ली के RML अस्पताल में ही एक गंभीर किडनी रोगी को ट्रांसप्लांट की गई।
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लिवर: लिवर को दिल्ली के ही 'आर्मी हॉस्पिटल (R&R)' में भर्ती एक मरीज के लिए भेजा गया।
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दिल: सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य हृदय को लखनऊ पहुंचाना था, जिसे 'SGPGI' लखनऊ के एक हृदय रोगी को दिया गया।
दिल्ली पुलिस और डॉक्टरों का तालमेल
अंगों को सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए सुबह करीब 3:30 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ।
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ग्रीन कॉरिडोर: दिल्ली पुलिस ने सड़क मार्ग पर 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया ताकि लिवर को बिना किसी ट्रैफिक बाधा के RR अस्पताल पहुंचाया जा सके।
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एयर एम्बुलेंस: हृदय को समय पर लखनऊ पहुंचाने के लिए एयर एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया गया।
अस्पताल प्रशासन, NOTTO और पुलिस के इस आपसी समन्वय से तीनों ट्रांसप्लांट सफल रहे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद डोनर के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके परिवार को सौंप दिया गया।
अधिकारियों ने जताया आभार
अस्पताल के निदेशक और मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने डोनर के परिवार के प्रति गहरी संवेदना और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "इतने बड़े नुकसान के समय में भी दूसरों की जान बचाने का फैसला लेना वीरता का काम है।"