Edited By Rohini Oberoi,Updated: 09 Apr, 2026 10:41 AM

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (MYH) के डॉक्टरों ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। ईएनटी (ENT) विभाग के विशेषज्ञों ने एक साल के मासूम के गले में फंसी 3 इंच की जिंदा मछली को सुरक्षित बाहर...
3-inch Fish in Toddler's Throat : मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (MYH) के डॉक्टरों ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। ईएनटी (ENT) विभाग के विशेषज्ञों ने एक साल के मासूम के गले में फंसी 3 इंच की जिंदा मछली को सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी जान बचाई है। मध्य भारत में इस तरह का यह पहला और दुर्लभ मामला बताया जा रहा है।
कैसे हुआ हादसा?
यह घटना तब हुई जब बच्चे के परिजन घर में लगे एक्वेरियम की सफाई कर रहे थे। सफाई के दौरान बच्चे का बड़ा भाई हाथ में मछली पकड़े हुए था। पास ही खेल रहे एक साल के मासूम ने खेल-खेल में वह मछली अपने मुंह में डाल ली। जिंदा मछली बच्चे के गले के पिछले हिस्से (स्वरयंत्र) में जाकर बुरी तरह फंस गई।
मौत के करीब था मासूम
जब बच्चे को अस्पताल लाया गया तो उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। मछली गले में फंसी होने के कारण बच्चा सांस नहीं ले पा रहा था। मासूम के मुंह से लगातार खून निकल रहा था। ऑक्सीजन की कमी के चलते बच्चे का शरीर नीला पड़ने लगा था और वह रोने की स्थिति में भी नहीं था।
डॉक्टरों की चुनौती: मछली के पंखों से था खतरा
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। चुनौती यह थी कि मछली न केवल लंबी थी बल्कि वह गले के अंदर हिल रही थी। मछली के धारदार पंखों और गलफड़ों से बच्चे की सांस की नली फटने का डर था। डॉक्टरों ने बड़ी ही सावधानी से एंडोस्कोपी (Endoscopy) के जरिए उस 'गोरामी मछली' को बाहर निकाला। मछली बाहर आते ही बच्चे ने चैन की सांस ली।
डॉक्टरों की सलाह: रहे सावधान
डॉ. यामिनी गुप्ता ने इसे अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण केस बताया। उन्होंने अभिभावकों को चेतावनी देते हुए कहा- "छोटे बच्चों की सांस की नली बहुत संकरी होती है। उनके पास ऐसी कोई भी छोटी या जीवित वस्तु न रखें जिसे वे निगल सकें। यह महज एक सर्जरी नहीं, बल्कि बच्चे की किस्मत और डॉक्टरों के कौशल की परीक्षा थी।" फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।