Edited By Pardeep,Updated: 26 Apr, 2026 10:52 PM

महाराष्ट्र में विरोध के बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी टिप्पणी को लेकर रविवार को "गहरा खेद" जताते हुए कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान...
नेशनल डेस्कः महाराष्ट्र में विरोध के बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी टिप्पणी को लेकर रविवार को "गहरा खेद" जताते हुए कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री के उस कथित बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्ध से थककर अपनी जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे और अपने 'गुरु' समर्थ रामदास के पास मुकुट लेकर पहुंचे थे।
नागपुर में रविवार को संवाददाता सम्मेलन में शास्त्री ने कहा कि शिवाजी महाराज के बारे में उनकी बातों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। आध्यात्मिक उपदेशक ने कहा कि उन पर शिवाजी महाराज का अपमान करने के आरोप से उन्हें पीड़ा हुई है। शास्त्री ने कहा, "उनका अपमान करना तो दूर, मैं सपने में भी किसी को छत्रपति शिवाजी महाराज की आलोचना करते नहीं देख सकता।"
उन्होंने कहा कि 'हिंदू राष्ट्र' का उनका संकल्प 'हिंदवी स्वराज' की अवधारणा से प्रेरित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने वक्तव्य में वह शिवाजी महाराज की संतों, महंतों और देवी तुलजाभवानी के प्रति श्रद्धा को रेखांकित करना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि समर्थ रामदास ने शिवाजी महाराज द्वारा दिए गए मुकुट को वापस उनके सिर पर रखकर उन्हें शासन जारी रखने की सलाह दी थी।
शास्त्री ने कहा, "कुछ लोगों ने मेरी बातों को गलत तरीके से पेश किया। यदि मेरी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए बेहद क्षमाप्रार्थी हूं। मैं चाहता हूं कि मेरे बयान को गलत ढंग से प्रस्तुत न किया जाए, क्योंकि मैं शिवाजी महाराज के लिए जीता और मरता हूं।" अपने उस विवादित बयान का उल्लेख करते हुए, जिसमें लोगों से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समर्पित करने की बात कही गई थी, धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका आशय बच्चों को 'संघ जैसे कट्टर राष्ट्रवादी' और सनातनी विचारधारा वाला बनाने से था।