Edited By Parveen Kumar,Updated: 18 Apr, 2026 11:27 PM

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद शनिवार को उन पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है और उन्हें महिला आरक्षण के नाम पर 'कुटिल' परिसीमन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के 'कपटपूर्ण' प्रयासों के लिए महिलाओं से माफी...
नेशनल डेस्क : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद शनिवार को उन पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है और उन्हें महिला आरक्षण के नाम पर 'कुटिल' परिसीमन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के 'कपटपूर्ण' प्रयासों के लिए महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए थी। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि बेहतर होता कि वह राष्ट्र के नाम संबोधन के बजाय संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करके इस तरह के दलगत आरोप लगाते।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "एक मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन में एक पवित्रता होती है। यह एक गैर-दलीय संबोधन होता है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय संकल्प और विश्वास का निर्माण करना है। यह दयनीय दलगत और विवादास्पद हमला, किसी राष्ट्रीय संबोधन के बजाय किसी संवाददाता सम्मेलन में अधिक उपयुक्त होता।" रमेश ने कहा, "कल रात लोकसभा में उन्हें जो असाधारण विधायी मात का सामना करना पड़ा उससे वह भले ही प्रभावित नहीं होने का दिखावा करें, लेकिन गैर-गृहस्थ प्रधानमंत्री अभी भी मीडिया का सामना करने से डरे हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित न करा पाने के लिए माफी मांगी है। उन्हें महिलाओं के नाम पर एक कुटिल परिसीमन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के अपने बेशर्म, कपटपूर्ण प्रयासों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी।" रमेश ने आरोप लगाया, "प्रधानमंत्री की नीयत साफ नहीं है, यह विद्वेषपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि अगर किसी को प्रधानमंत्री की नीयत को परखना है, तो उसे केवल यह पूछना होगा कि सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को क्यों अधिसूचित किया गया था? रमेश ने आरोप लगाया कि उनका महिला सम्मान की बात करना सरासर पाखंड है।
कांग्रेस नेता ने कहा, "प्रधानमंत्री ने कल लोकसभा में जो प्रयास किया, हमारे लोकतंत्र और हमारे संघवाद को कमजोर करने का प्रयास था, वह बिल्कुल संविधान पर उसी तरह का हमला था, जिसकी आशंका तब जताई गई थी जब प्रधानमंत्री ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए '400 पार' का आह्वान किया था।" रमेश ने कहा, "संविधान निर्माताओं की विरासत का आह्वान करने के उनके प्रयास केवल उनकी बेईमानी को दर्शाते हैं।" कांग्रेस नेता ने कहा, "प्रधानमंत्री के अधिक हास्यास्पद दावों में यह था कि कांग्रेस ने जन धन-आधार- मोबाइल और जीएसटी का विरोध किया था। दोनों पूरी तरह से कांग्रेस की देन हैं।"
उन्होंने कहा, "इंदिरा गांधी ने बैंकिंग उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया और सार्वभौमिक बैंक पहुंच की नींव रखी। आधार को डॉ. मनमोहन सिंह ने 29 सितंबर, 2010 को महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से शुरू किया था। भारत की डिजिटल क्रांति की संकल्पना और कार्यान्वयन राजीव गांधी के दृष्टिकोण और मिशन द्वारा किया गया था।'' रमेश ने कहा, ''इसी तरह जीएसटी को भी डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आगे बढ़ाया था और केवल गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री (मोदी) के विरोध के कारण इसे पारित नहीं कराया जा सका था। उन्हीं मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और मनरेगा का विरोध किया, जो कोविड -19 महामारी के दौरान करोड़ों भारतीयों के लिए जीवन रेखा साबित हुई।"
रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री झूठ बोलने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने आज रात एक बार फिर यह साबित कर दिया। कांग्रेस नेता ने कहा, "प्रधानमंत्री ने अपना भाषण यह कहकर समाप्त किया कि महिला आरक्षण के लिए 'वक्त का इंतजार' है। भारत की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को लोकसभा की मौजूदा व्यवस्था के भीतर महिला आरक्षण लागू करने के लिए कल संसद में विधेयक लाने की चुनौती दी है।"