Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 09 Mar, 2026 09:42 PM

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के दौरान चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन और पुलिस को कड़ा संदेश दिया है।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के दौरान चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन और पुलिस को कड़ा संदेश दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य पुलिस के कानून-व्यवस्था प्रमुख Vineet Goyal से तीखे सवाल किए और नारकोटिक्स एडवाइजरी बोर्ड के गठन न होने पर नाराजगी जताई।
सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान जब इस विषय पर जवाब मांगा गया तो अधिकारी का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में ही बैठने को कहा और स्पष्ट किया कि आयोग के पास संबंधित सभी रिकॉर्ड मौजूद हैं।
बैठक में चुनावी तैयारियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान कई केंद्रीय एजेंसियों को भी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई। इनमें Reserve Bank of India, Airports Authority of India, सीमा शुल्क विभाग, उत्पाद शुल्क विभाग और Narcotics Control Bureau शामिल हैं। आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अधिकारियों को चेताया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने दायित्व पूरी गंभीरता से निभाने होंगे।
इसके अलावा बैठक में राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों और IPS अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया कि चुनाव के बाद किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने साफ कहा कि मतदाताओं को भयमुक्त माहौल में मतदान करने का पूरा अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। बैठक के बाद चुनाव आयोग की टीम ने जिला मजिस्ट्रेटों के साथ अलग से चर्चा कर जमीनी स्तर पर तैयारियों का आकलन किया।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ इन दिनों पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर है, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की जा रही है। इस बीच विपक्षी दलों ने पहले ही कम चरणों में मतदान और हिंसा-मुक्त चुनाव की मांग उठाई है। ऐसे में आयोग की सख्त टिप्पणियों को प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।