Edited By Pardeep,Updated: 14 Aug, 2026 11:47 PM

महाराष्ट्र के नए खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे के साथ डिनर के दौरान एक ऐसा वाकया पेश आया, जिसने राज्य में मिलावटखोरों की पोल खोलकर रख दी है। हाल ही में कमिश्नर मुंढे अपने एक दोस्त के निमंत्रण पर रेस्टोरेंट में डिनर करने गए थे।
मुंबई: महाराष्ट्र के नए खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे के साथ डिनर के दौरान एक ऐसा वाकया पेश आया, जिसने राज्य में मिलावटखोरों की पोल खोलकर रख दी है। हाल ही में कमिश्नर मुंढे अपने एक दोस्त के निमंत्रण पर रेस्टोरेंट में डिनर करने गए थे। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मजाक में अपने दोस्त से कहा था कि वह शायद अपनी नई जिम्मेदारियों के कारण खाने का आनंद लेने के बजाय केवल कमियां ही ढूंढते रहेंगे। लेकिन यह मजाक जल्द ही हकीकत में बदल गया।
कमिश्नर की पारखी नजर से नहीं बच सका 'नकली पनीर'
रेस्टोरेंट पहुंचते ही मुंढे ने पाया कि वहां का अनिवार्य फूड लाइसेंस प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं किया गया था। इसके बाद जब उनके दोस्त ने पनीर की एक डिश ऑर्डर करने की कोशिश की, तो मुंढे ने उन्हें पहले ही चेतावनी देते हुए कहा, "पनीर ऑर्डर मत करो, यह निश्चित रूप से मेरी आंखों के टेस्ट में पास नहीं होने वाला"। जैसे ही पनीर की डिश टेबल पर आई, कमिश्नर ने उसकी बारीकी से जांच की और पाया कि वह असली पनीर नहीं, बल्कि मिलावटी पनीर (एनालॉग पनीर) था। उन्होंने तुरंत अपने दोस्त को इसे खाने से मना कर दिया।
कार्रवाई के लिए दिया सिर्फ 24 घंटे का समय
रेस्टोरेंट में इस गंभीर गड़बड़ी और पानी की खराब व्यवस्था को देखने के बाद कमिश्नर मुंढे ने तुरंत कोई दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय प्रबंधन को अपनी गलतियां सुधारने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया। ठीक 24 घंटे बाद, जब एफडीए (FDA) के अधिकारियों ने वहां जाकर औचक निरीक्षण किया, तो रेस्टोरेंट में नियमों के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाए गए।
पूरे महाराष्ट्र में मिलावटखोरों के खिलाफ महाअभियान
2005 बैच के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने करीब तीन महीने पहले ही महाराष्ट्र एफडीए का कार्यभार संभाला है और तब से उन्होंने मिलावटखोरों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत रेस्टोरेंट, आइसक्रीम पार्लर, डेयरी और ई-कॉमर्स प्रतिष्ठानों पर स्वच्छता व सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में एफडीए अधिकारियों ने 3,100 से अधिक निरीक्षण किए हैं, जिनमें 165 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और 750 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार के नोटिस जारी किए गए हैं।
आलोचकों को दिया करारा जवाब
सख्त कार्रवाई के कारण कमिश्नर मुंढे को कुछ क्षेत्रों में आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है, जहां लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा सख्त बताया जा रहा है। इस पर अपना पक्ष रखते हुए मुंढे ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाली किसी भी लापरवाही पर त्वरित कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया, "यह अभियान मेरे व्यक्तिगत प्रचार के लिए नहीं है, बल्कि यह खाद्य क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा और मानकों को सुधारने के लिए है। अगर हालात इतने सुधर जाएं कि एफडीए को कहीं जाने की जरूरत न पड़े और इसे बंद करना पड़े, तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी"।