Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Aug, 2026 10:11 AM
महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब राज्य में ऐसे पनीर को बनाना, बेचना, रखना या सप्लाई करना अपराध माना जाएगा। नियम तोड़ने वालों को 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता...
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब राज्य में ऐसे पनीर को बनाना, बेचना, रखना या सप्लाई करना अपराध माना जाएगा। नियम तोड़ने वालों को 6 महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अगर मिलावटी या असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो सख्त सजा का प्रावधान है। नकली और मिलावटी डेयरी उत्पादों की बिक्री को रोकने के लिए उठाए गए इस कदम के साथ, छत्तीसगढ़ के बाद महाराष्ट्र ऐसा प्रतिबंध लगाने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
एनालॉग पनीर दूध से नहीं, बल्कि वनस्पति तेल, वसा और अन्य गैर-डेयरी चीजों से बनाया जाता है। कई बार इसे असली पनीर बताकर बेचा जाता है, जिससे ग्राहकों को धोखा होता है। महाराष्ट्र FDA ने नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में पुणे में छापेमारी कर करीब 1,400 किलो नकली पनीर और इसे बनाने वाली सामग्री जब्त की गई थी।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंडे के जारी आदेश के अनुसार, पूरे राज्य में एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, थोक और खुदरा बिक्री, वितरण और बिक्री के लिए पेश करने पर रोक लगा दी गई है।
छह महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
अपराध की गंभीरता के आधार पर, 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' के तहत उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जिन मामलों में असुरक्षित भोजन के सेवन से मौत हो जाती है, वहां कानून में उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने यह भी चेतावनी दी है कि एनालॉग पनीर को असली डेयरी पनीर बताकर बेचना ग्राहकों को गुमराह करने और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार के बराबर होगा। विभाग ने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों या प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एनालॉग पनीर आमतौर पर दूध के फैट के विकल्प के तौर पर वेजिटेबल फैट या तेल और अन्य नॉन-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। हालांकि ऐसे उत्पाद पारंपरिक पनीर जैसे दिख सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने ग्राहकों को सही जानकारी दिए बिना इन्हें असली डेयरी उत्पादों के तौर पर बेचने पर चिंता जताई है।
यह मुद्दा पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठा था, जहां विधायकों ने एनालॉग पनीर पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की थी। 30 जुलाई के आदेश से अब पूरे राज्य में ऐसे उत्पादों से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों पर औपचारिक रूप से रोक लग गई है।
यह फैसला महाराष्ट्र में मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ तेज की गई कार्रवाई के बीच आया है। मई से ही सिंथेटिक दूध और पनीर बनाने वाली इकाइयों को निशाना बनाकर राज्यव्यापी अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत कई छापे मारे गए हैं और सामान जब्त किया गया है।
इससे पहले पुणे के मंजरी खुर्द इलाके में एक गोदाम पर की गई बड़ी कार्रवाई में अधिकारियों ने कथित नकली पनीर बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया और करीब 1,400 किलोग्राम पनीर जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार, यह पनीर सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल करके तैयार किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान 1,800 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क पाउडर, 400 किलोग्राम ग्लिसरॉल मोनोस्टियरेट (GMS) पाउडर और 718 लीटर पाम ऑयल सहित अन्य सामग्री भी जब्त की गई, जिनका कथित रूप से नकली डेयरी उत्पाद बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा था।
गैर-डेयरी पनीर के खिलाफ यह कार्रवाई महाराष्ट्र में अस्वच्छ रेस्तरां और होटलों के खिलाफ चल रहे व्यापक निरीक्षण अभियान के बीच हुई है। मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्द किए गए हैं और कई जगहों को बंद कराया गया है।