Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Aug, 2026 08:48 AM

नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। एक तरफ जहां बचाव दल राहत कार्यों में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के भू-वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करके...
नेपाल: नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। एक तरफ जहां बचाव दल राहत कार्यों में लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के भू-वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करके इस तबाही की मुख्य वजह का पता लगाने में जुटे हैं।
कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डैन शुगर और फ्रांस की यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल एल्प्स की वैज्ञानिक क्रिस्टन कुक के अनुसार, शुरुआती तस्वीरें साफ नहीं थीं, लेकिन बाद में मिले हाई-रेज़ोल्यूशन सैटेलाइट डेटा से पूरी घटना की तस्वीर साफ हुई और वे केवल इतना देख पाए कि तिब्बत सीमा के पास लैंगटांग लिरुंग चोटी से ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर अलग हो गया था।
गुरुवार को मिली तस्वीरों में वे देख पाए कि ग्लेशियर के नीचे की चट्टान (बेडरॉक) ढह गई थी, जिससे बर्फ का एक बड़ा हिस्सा भी नीचे आ गया और घाटी में बड़े-बड़े पत्थर और बर्फ फैल गए। फ्रांस की यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल एल्प्स में काम करने वाली कुक के अनुसार, घाटी की सतह से टकराने के बाद भी ढलान पर मलबे की गति बनी रही।
नेपाल के कोलपुरतार, बेत्रावती और स्याप्रु बेसी इलाकों की 'पहले और बाद' की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि नदी अब काफी चौड़ी हो गई है और उसका रंग भूरा और काला हो गया है, क्योंकि कुछ जगहों पर यह अपने किनारों से बाहर बह गई और दूसरी जगहों पर इसमें मलबा भर गया। कुक ने कहा कि पानी के रंग में बदलाव से पता चलता है कि बहाव में कितनी गाद (सेडिमेंट) थी, कीचड़ से भरे होने के कारण पानी का रंग हरे से बदलकर बहुत गहरा भूरा हो गया।
कुक ने कहा, "हालांकि अभी हम इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से नहीं जोड़ सकते, लेकिन गर्म होती जलवायु के साथ इस तरह की और घटनाएं देखना कोई हैरानी की बात नहीं है।" बोल्डर में कोलोराडो यूनिवर्सिटी के माउंटेन जियोोग्राफ़र एल्टन बायर्स ने कहा कि अचानक आई बाढ़ ने सब कुछ बंजर बना दिया और इससे उबरने में कई साल लग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि बुधवार की घटना ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हुई।