25 साल के युवक पर नहीं, बल्कि आपराधिक मामलों वाले सांसदों पर ध्यान दें, CJP ने जीरो FIR पर नाराजगी जताई

Edited By Updated: 31 Jul, 2026 09:07 PM

focus on mps with criminal cases not on a 25 year old youth

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में छात्रा रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि अपमानजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा...

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में छात्रा रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि अपमानजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी टिप्पणियों के लिए आपराधिक मुकदमा चलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है।

पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी टिप्पणी से ठेस पहुंची है, तो उसके पास सिविल या आपराधिक मानहानि का रास्ता अपनाने का विकल्प मौजूद है। लेकिन केवल आपत्तिजनक भाषा के आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय है।

उन्होंने कहा, "भाषा गलत हो सकती है और किसी को आपत्तिजनक लग सकती है, लेकिन यह किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं बनना चाहिए। ऐसे कदम डर का माहौल पैदा करते हैं और खासकर युवा पीढ़ी के लिए यह स्वीकार्य नहीं है।"

NEET प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई थी जीरो FIR

यह मामला 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से "अपमानजनक और आपत्तिजनक" टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की गई थी।

दास ने युवाओं से विरोध प्रदर्शन के दौरान संयमित भाषा का इस्तेमाल करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि असहमति जताते समय शब्दों का चयन सावधानी से होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद आपराधिक मुकदमा चलाना बेहद कठोर और अनुचित कदम है।

उन्होंने कहा, "मैं युवाओं से आग्रह करूंगा कि वे अपने शब्दों को लेकर सतर्क रहें। लेकिन पुलिस को भी राजनीतिक मकसद से अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।"

'100 बीजेपी सांसदों पर केस, लेकिन निशाने पर 25 साल की लड़की'

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सौरव दास ने अपनी बात दोहराई। उन्होंने लिखा कि रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल पुलिस की शक्तियों के दुरुपयोग का उदाहरण है। उन्होंने पोस्ट में कहा, "अभद्र भाषा के लिए आपराधिक केस नहीं बनता। लोकसभा के करीब 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लगभग 100 बीजेपी सांसद शामिल हैं। पुलिस को उन मामलों पर ध्यान देना चाहिए, न कि 25 साल की एक लड़की पर। युवाओं को परेशान करना तुरंत बंद होना चाहिए।"

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर 29 जुलाई को गौतम बुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और उनका उद्देश्य दुर्भावना फैलाना तथा सार्वजनिक शांति भंग करना था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), धारा 353(1) (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) और धारा 356(1) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया है।

क्या होती है जीरो FIR?

'जीरो FIR' ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत कोई भी पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कर सकता है, भले ही कथित घटना उसके अधिकार क्षेत्र में न हुई हो। इसका उद्देश्य अधिकार क्षेत्र की वजह से जांच में होने वाली देरी को रोकना होता है।

36 दिन बाद खत्म हुआ था आंदोलन

रुचिका सिंह का मामला NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों के नेतृत्व में चले CJP के आंदोलन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन 36 दिनों तक चला, जिसके दौरान पुलिस के साथ टकराव और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे घटनाक्रम भी सामने आए। 25 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा आंदोलन की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।

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