Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Feb, 2026 10:09 AM

भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों जो उठापटक दिख रही है, उसने खरीदारों और निवेशकों को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां एमसीएक्स (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 18 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट के साथ गोता लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे...
नेशनल डेस्क: भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों जो उठापटक दिख रही है, उसने खरीदारों और निवेशकों को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां एमसीएक्स (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 18 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट के साथ गोता लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों में शुमार 'JP Morgan' की एक रिपोर्ट ने बाजार में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अभी की यह मंदी महज एक छोटा सा ठहराव है, क्योंकि आने वाले समय में सोने की चमक इतनी तेज होगी कि वह 2,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के पार निकल सकता है।
7.79 लाख के पार जाएगी सोने की कीमत
बाजार में मची इस भगदड़ के पीछे मुनाफावसूली को बड़ी वजह माना जा रहा है। शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने वाले अब इस असमंजस में हैं कि खरीदारी अभी करें या दाम और गिरने का इंतजार। हालांकि, जेपी मॉर्गन के रणनीतिकारों का नजरिया बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि सोना अब सिर्फ संकट का साथी नहीं रहा, बल्कि लोगों के निवेश का मुख्य हिस्सा बनता जा रहा है। उनके अनुमान के अनुसार, अगर दुनिया भर के निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी मामूली रूप से भी बढ़ाते हैं, तो मांग और सीमित सप्लाई के बीच यह अंतर सोने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में 8,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 7.79 लाख रुपये) तक ले जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि अब लोग लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड के मुकाबले सोने को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि सोना किसी सरकार या संस्था की देनदारी नहीं है, इसलिए आर्थिक अस्थिरता के दौर में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। यहां तक कि कई एक्सपर्ट्स तो शेयर बाजार की तेजी को भी सोने के सामने फीका बता रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में शेयरों की उछाल केवल एक भ्रम हो सकती है, जबकि असली ताकत सोने की कीमतों में छिपी है।
रिपोर्ट में एक और खास बात निकलकर आई है कि खुदरा निवेशक अब डिजिटल करेंसी यानी बिटकॉइन की तुलना में सोने पर कहीं ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। जहां क्रिप्टो बाजार में अस्थिरता का डर रहता है, वहीं सोने में होने वाला निवेश कहीं ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित नजर आता है। फिलहाल भारतीय बाजार में अप्रैल और फरवरी फ्यूचर्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे एक तरफ तो डर का माहौल है, लेकिन लंबी अवधि के खिलाड़ी इसे एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं।