Edited By Ramanjot,Updated: 16 Feb, 2026 05:44 PM

सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी के ₹1.80 लाख के शिखर से सोना करीब ₹24,500 टूटकर ₹1.56 लाख के करीब आ गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बाजार में सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर से भी नीचे गिर सकता है।
Gold Price Crash: भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट का सिलसिला जारी है। जनवरी 2026 में ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने वाला सोना अब अपने ऊंचे स्तर से लगभग 13.50% (₹24,500) फिसल चुका है। सोमवार को एमसीएक्स (MCX) पर सोना 0.61% की गिरावट के साथ ₹1,54,937 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट महज एक शुरुआत हो सकती है।
रूस का 'यू-टर्न' और डॉलर की वापसी
सोने में आई इस अचानक गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूस का अमेरिकी डॉलर (USD) के प्रति बदलता रुख माना जा रहा है।
डी-डॉलराइजेशन को झटका: लंबे समय से डॉलर के खिलाफ अभियान चलाने वाला रूस अब अमेरिका के साथ फिर से डॉलर में व्यापार की संभावनाएं तलाश रहा है।
ब्रिक्स (BRICS) की रणनीति: ब्रिक्स देशों ने डॉलर को चुनौती देने के लिए 'गोल्ड बेस्ड ट्रेड' का सपना देखा था। रूस की डॉलर में संभावित वापसी इस लक्ष्य को कमजोर कर रही है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट गई है।
ब्रिक्स और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में आई उछाल कृत्रिम मांग के कारण थी:
आक्रामक खरीदारी: 2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्वर्ण खरीद का 50% हिस्सा ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने खरीदा।
ट्रंप फैक्टर: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद टैरिफ के डर से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने सोने का स्टॉक जमा करना शुरू किया, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया।
भविष्यवाणी: क्या ₹1 लाख से नीचे आएगा सोना?
PACE 360 के अमित गोयल जैसे विशेषज्ञों ने सोने को लेकर मंदी के संकेत दिए हैं। उनका मानना है कि सबसे पहले डिजिटल या पेपर गोल्ड में बिकवाली होगी, जिसका असर भौतिक सोने (Physical Gold) पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $3,000 प्रति औंस तक गिर सकता है। वहीं भारत में कीमतें ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर से भी नीचे जा सकती हैं। बाजार में आने वाली किसी भी छोटी तेजी को एक्सपर्ट 'डेड कैट बाउंस' कह रहे हैं, यानी एक अस्थायी उछाल जो बड़ी गिरावट का संकेत है।