Edited By Purnima Singh,Updated: 24 Jun, 2026 02:06 PM

देश में बढ़ती बांझपन की समस्याओं, देर से माता-पिता बनने की प्रवृत्ति और सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने IVF और सरोगेसी सेवाएं देने वाले संस्थानों की निगरानी को और कड़ा करने का फैसला किया है ...
नेशनल डेस्क : देश में बढ़ती बांझपन की समस्याओं, देर से माता-पिता बनने की प्रवृत्ति और सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने IVF और सरोगेसी सेवाएं देने वाले संस्थानों की निगरानी को और कड़ा करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब इन केंद्रों को केवल एक बार पंजीकरण लेकर काम करने की छूट नहीं होगी, बल्कि तय अंतराल पर उनके कामकाज, सुविधाओं और मानकों की समीक्षा की जाएगी।
नियमों में किया गया संशोधन
केंद्र सरकार ने सहायक प्रजनन तकनीक (ART) और सरोगेसी से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए सभी पंजीकृत संस्थानों के लिए नियमित पंजीकरण नवीनीकरण की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सरोगेसी क्लीनिकों को हर तीन वर्ष और ART क्लीनिकों को हर पांच वर्ष बाद अपना पंजीकरण दोबारा नवीनीकृत कराना होगा।
तेजी से बढ़ रहा है ART सेक्टर
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में IVF, एग फ्रीजिंग, सरोगेसी और अन्य प्रजनन सेवाओं का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार वर्ष 2025 में ART सेक्टर का आकार लगभग 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। देशभर में हजारों ART क्लीनिक और बैंक संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 में नियम लागू होने से पहले इनमें से बड़ी संख्या अनियमित ढंग से संचालित हो रही थी।
60 दिन पहले करना होगा आवेदन
नए प्रावधानों के अनुसार सभी पंजीकृत ART क्लीनिक, ART बैंक और सरोगेसी केंद्रों को अपने मौजूदा पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले राष्ट्रीय रजिस्ट्री पोर्टल पर नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा।
नवीनीकरण शुल्क भी निर्धारित
शुल्क व्यवस्था भी तय की गई है। लेवल-1 ART क्लीनिकों और ART बैंकों के लिए नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपये रखा गया है। वहीं लेवल-2 ART क्लीनिकों और सरोगेसी केंद्रों को एक लाख रुपये का शुल्क देना होगा।
आवेदन खारिज करने से पहले मिलेगा सुनवाई का अवसर
सरकार ने आवेदन अस्वीकार होने की स्थिति में भी संस्थानों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की अधिसूचना के अनुसार किसी भी आवेदन को बिना संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए खारिज नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा यदि किसी आवेदन में कमियां पाई जाती हैं और संस्था उन्हें दूर कर दोबारा आवेदन प्रस्तुत करती है, तो पुनर्विचार के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद
क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने में मदद करेगी। नियमित निरीक्षण और नवीनीकरण की प्रक्रिया से संस्थानों को गुणवत्ता, दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए अधिक जिम्मेदार बनना पड़ेगा।
छोटे केंद्रों पर बढ़ सकता है दबाव
हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि छोटे शहरों और कस्बों में तेजी से खुल रहे छोटे निजी केंद्रों पर इन नियमों का अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, इससे ऐसे संस्थानों की पहचान करना आसान होगा जो तय मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं या अनैतिक तरीके से काम कर रहे हैं।