सरकारी अस्पताल में बड़ी लापरवाही: BP Patient को चढ़ा दी 'एक्सपायर्ड' ग्लूकोज की बोतल, बिगड़ी हालत

Edited By Updated: 14 Jul, 2026 11:32 AM

gujarat expired glucose bottle administered to blood pressure patient

गुजरात की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की मुस्तैदी पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। बनासकांठा जिले के दांता सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की एक बेहद गंभीर और जानलेवा लापरवाही सामने आई है। यहां इलाज के लिए आई ब्लड...

Gujarat Government Hospital Medical Negligence : गुजरात की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की मुस्तैदी पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। बनासकांठा जिले के दांता सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की एक बेहद गंभीर और जानलेवा लापरवाही सामने आई है। यहां इलाज के लिए आई ब्लड प्रेशर की एक महिला मरीज को एक्सपायर हो चुकी ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी गई। इस लापरवाही के कारण महिला के शरीर में रिएक्शन हो गया और उसके अंगों में सूजन आ गई। 

फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने अपनी बड़ी चूक स्वीकार करते हुए आरोपी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। बता दें कि पीड़ित महिला के परिजनों के अनुसार यह घटना दांता के सरकारी अस्पताल में रात के वक्त हुई। शाम को निजी अस्पताल बंद होने के कारण परिवार वाले महिला मरीज को लेकर तुरंत दांता के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचे थे।

परिजनों का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। पूरा नर्सिंग स्टाफ मरीजों की सुध लेने के बजाय अपने-अपने मोबाइल फोन चलाने में व्यस्त था।
महिला को ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के बाद ड्यूटी पर तैनात नर्स करीब 30 मिनट तक वार्ड से गायब रही। इसी दौरान जब परिजनों ने बोतल पर नजर डाली तो उनके होश उड़ गए वह ग्लूकोज पूरी तरह एक्सपायर्ड था।

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ग्लूकोज चढ़ते ही मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी जिससे आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने तीखा सवाल उठाया कि अगर इस घोर लापरवाही की वजह से मरीज की जान चली जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?

चूक हो गई  - अस्पताल प्रशासन ने मानी गलती

मामले के तूल पकड़ने के बाद दांता CHC के सुपरिटेंडेंट डॉ. के. के. सिंह ने अस्पताल की ओर से हुई इस बड़ी गलती को स्वीकार किया। यह बेहद गंभीर मानवीय भूल है। हालांकि मरीज को केवल 100 एमएल (ml) ग्लूकोज ही चढ़ाया गया था जिसे समय रहते रोक दिया गया। इस वजह से कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ है और मरीज की हालत फिलहाल पूरी तरह स्थिर है। वहीं अधीक्षक डॉ. के. के. सिंह ने बताया कि वैसे तो नियम के मुताबिक अस्पताल में हर महीने की 1 तारीख को सभी दवाओं और बोतलों की एक्सपायरी डेट जांची जाती है लेकिन यह विशेष बोतल जांच के दौरान कैसे छूट गई इसकी तहकीकात की जाएगी।

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उन्होंने आश्वासन दिया कि हादसे के वक्त नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और संबंधित नर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। अस्पताल के काम के घंटों के दौरान मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल करने वाली नर्स के खिलाफ कड़ा अनुशासनात्मक एक्शन लिया जाएगा। भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही दोबारा न हो इसके लिए अस्पताल के पूरे स्टाफ के साथ तत्काल एक इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

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