762 सीढ़ियां...40 फीट ऊंची शिव जी की विशाल मूर्ति, ये है पंजाब का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

Edited By Updated: 02 Aug, 2024 12:41 PM

highest shiva temple of punjab

पंजाब के होशियारपुर जिले के सहोड़ा गांव में स्थित गगन जी का टीला शिव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर पंजाब का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है और यहां तक पहुंचने के लिए 762 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए अब...

नेशनल डेस्क: पंजाब के होशियारपुर जिले के सहोड़ा गांव में स्थित गगन जी का टीला शिव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर पंजाब का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है और यहां तक पहुंचने के लिए 762 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए अब जिप्सी का भी प्रबंध कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिलती है।

सावन महीने और शिवरात्रि के दिन मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़
मंदिर की सीढ़ियों के आधे रास्ते पर दाईं ओर 40 फीट ऊंची शिव जी की विशाल और दिव्य मूर्ति दर्शनीय है। जब श्रद्धालु सीढ़ियों के शीर्ष पर पहुंचते हैं, तो उन्हें एक अलौकिक दृश्य देखने को मिलता है। यहां से एक तरफ शिवालिक की हरी-भरी वादियां नजर आती हैं, जबकि दूसरी ओर उत्तर में धौलाधार की बर्फ से ढकी पहाड़ियां और दक्षिण में पंजाब का हरा-भरा क्षेत्र दिखाई देता है। सावन महीने और शिवरात्रि के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। सभी भक्त जालंधर-पठानकोट हाईवे पर दसूहा कस्बे से 15 किलोमीटर, मुकेरियों से 22 किलोमीटर, हाजीपुर कस्बे से 6 किलोमीटर और होशियारपुर शहर से 56 किलोमीटर की यात्रा टैक्सी या रेल से पूरी कर इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

महाभारत काल से जुड़ा हुआ है मंदिर का इतिहास
गगन जी का टीला शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। प्रचलित कथा के अनुसार, जब पांडवों को 13 वर्षों का वनवास हुआ था, भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें एक सुनसान स्थान की खोज करने को कहा था। पांडवों ने सहोड़ा गांव के पास की पहाड़ी पर एक सुनसान स्थान देखकर वहां भगवान शिव की पूजा की। इस पूजा से भगवान शिव प्रगट हुए और पांडवों को आशीर्वाद दिया।

सावन महीने के दौरान मंदिर में रहता है उत्सव का माहौल
मंदिर की व्यवस्था महंत शिवगिरि और प्रबंधक समिति द्वारा की जाती है। सावन महीने के दौरान यहां हमेशा उत्सव का माहौल रहता है। मंदिर के कपाट तड़के तीन बजे खुल जाते हैं और भक्त पूजा करने के लिए पहुंचने लगते हैं। सावन और शिवरात्रि के दिन यहां भक्तों की संख्या लाखों में होती है। शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा और अगले दिन विशाल भंडारा मुख्य कार्यक्रम होते हैं।  

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