FDA की कार्रवाई के बाद भोजन की गुणवत्ता में हुआ सुधार, तुकाराम मुंढे बोले- नियमों से कोई समझौता नहीं

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 09:26 PM

improvement in food quality following fda action

रेस्तरां और खाने-पीने से जुड़े कारोबार के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई को सही ठहराते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा है कि प्रतिष्ठानों की बहानेबाजी पर नियामक ध्यान नहीं देता, बल्कि ''तथ्यों'' के आधार पर कार्रवाई करता है।

नेशनल डेस्क : रेस्तरां और खाने-पीने से जुड़े कारोबार के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई को सही ठहराते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा है कि प्रतिष्ठानों की बहानेबाजी पर नियामक ध्यान नहीं देता, बल्कि ''तथ्यों'' के आधार पर कार्रवाई करता है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के की गई है और इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। मुंढे ने बुधवार को मुंबई प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा, ''मैं प्रतिष्ठानों की बहानेबाजी पर ध्यान नहीं देता। मैं अपने अधिकारियों से तथ्यों पर गौर करने के लिए कहता हूं।'' उन्होंने कहा कि कई प्रतिष्ठानों ने अपने लाइसेंस निलंबित होने के बाद अपनी रसोई और परिसर में काफी सुधार किया है। उन्होंने कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को भोजन की गुणवत्ता और स्वाद में सुधार को लेकर अलग-अलग शहरों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

मुंढे ने कहा, ''हर खाद्य प्रतिष्ठान के लिए खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (एफएसएमएस) बनाए रखना जरूरी है, लेकिन जब इसे लागू करने की कार्रवाई शुरू हुई, तो कई प्रतिष्ठानों को इस शब्द के बारे में पता तक नहीं था।'' उन्होंने कहा, ''आज अगर आप किसी रेस्तरां में जाकर एफएसएमएस के बारे में पूछें, तो कम से कम उन्हें पता होता है कि इसका क्या मतलब है। इतना बदलाव तो आया ही है।'' मुंढे ने एफडीए की कार्रवाई के अच्छे नतीजों का जिक्र करते हुए दावा किया कि दक्षिण मुंबई के कुछ रेस्तरां ने खुद को पूरी तरह से बदल लिया है। उन्होंने कहा, ''मैंने कुछ ऐसी जगहों के वीडियो देखे हैं जिनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। उन्होंने काफी सुधार किए हैं, खासकर अपनी रसोई में।

एफडीए को पुणे, मुंबई, विभिन्न गांवों और मराठवाड़ा इलाके से भोजन की गुणवत्ता और स्वाद में सुधार के बारे में जानकारी मिली है।'' उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों ने अपने कामकाज की समीक्षा करने के लिए महीने में एक बार या हर दो हफ्ते में एक बार काम बंद करने का फैसला किया है। मुझे लगता है कि यह आगे बढ़ने का एक अच्छा तरीका है।'' उन्होंने कहा कि अगर कारोबार नियमों का पालन करते हैं, तो नियामकों को बार-बार उनके यहां जाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। मुंढे, एफडीए द्वारा खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां (जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं) के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में रहे हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में, एफडीए आयुक्त ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी, न कि उनके प्रबंधन द्वारा दी गई सफाई के आधार पर। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खाद्य नियामक अधिक जोखिम वाले प्रतिष्ठानों पर ध्यान दे रहा है और होटलों, रेस्तरां या खाने-पीने के दूसरे कारोबारों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता है।

आईएएस अधिकारी ने कहा, ''हम होटलों, रेस्तरां वगैरह के बीच कोई भेदभाव नहीं करते हैं। हम अधिक जोखिम वाली श्रेणी पर ध्यान देते हैं। विभाग ने पांच सितारा प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।'' एफडीए की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एजेंसी ने जुलाई के आखिर तक 3,100 से अधिक भोजन कारोबार संचालकों और दवा क्षेत्र में लगभग 100 प्रतिष्ठानों की जांच की, जिसके परिणामस्वरूप 165 लाइसेंस निलंबित किए गए और लगभग 450 सुधार नोटिस जारी किए गए।

दुग्ध सुरक्षा के बारे में मुंढे ने कहा कि एफडीए दूध की आपूर्ति श्रृंखला पर डिजिटल रूप से नजर रखने के लिए एक प्रणाली पर काम कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमन रोजाना की गतिविधि है और यह प्रमाणित करना मुमकिन नहीं है कि राज्य में मिलने वाला दूध सुरक्षित है या असुरक्षित। मुंढे ने यह भी कहा कि एफडीए खाने-पीने की चीजों और उनसे जुड़े विज्ञापनों पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, ''हम सभी विज्ञापनों पर नजर रख रहे हैं।'' सरकारी नौकरी में बने रहने और संभावित तबादले के बारे में पूछे जाने पर मुंढे ने कहा कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है। 

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