Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Aug, 2026 09:36 AM

नाशकारी जलप्रलय ने नेपाल से लेकर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक भारी तबाही मचाई है। बिते बुधवार को हिमालय में हुए भूस्खलन से निकले भूकंपीय सिग्नल और नेपाल-तिब्बत सीमा पर रासुवागढ़ी तक पहुंची विनाशकारी बाढ़ की लहर के बीच सिर्फ़ सात मिनट का फ़र्क था,...
नई दिल्ली: विनाशकारी जलप्रलय ने नेपाल से लेकर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक भारी तबाही मचाई है। बिते बुधवार को हिमालय में हुए भूस्खलन से निकले भूकंपीय सिग्नल और नेपाल-तिब्बत सीमा पर रासुवागढ़ी तक पहुंची विनाशकारी बाढ़ की लहर के बीच सिर्फ़ सात मिनट का फ़र्क था, लेकिन बाढ़ का असर लगभग 200 किमी दूर तक फैला। इस फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से नेपाल के नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और नवलपरासी ईस्ट जिलों में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। नेपाल के चितवन जिले में सबसे ज्यादा 132 शव बरामद किए जा चुके हैं। पानी का तेज बहाव नेपाल के मैदानी इलाकों को पार करते हुए भारत के उत्तर प्रदेश (महाराजगंज) तक पहुंच गया, जहां गुरुवार को गंडक नदी से 3 और शव बरामद हुए। आशंका है कि ये शव नेपाल से ही बहकर भारत आए हैं।
बता दें कि आपदा की शुरुआत सुबह 8:37 बजे दर्ज हुई जब प्राथमिक भूकंपीय सिग्नल रिकॉर्ड किए गए। सुबह 8:40 बजे पानी नेपाल सीमा में दाखिल हुआ और सिर्फ 10 मिनट के भीतर स्याब्रूबेसी तक पहुंच गया। सीमा पर लगे सिक्योरिटी कैमरों में लोग जान बचाने के लिए भागते दिखे, लेकिन पानी की तेज़ लहर इमारतों और गाड़ियों को अपने साथ बहा ले गई। अधिकारियों को इस बहाव की भनक तब लगी जब पानी भोटे कोशी नदी में आ चुका था। नेपाल के हाइड्रोलॉजिस्ट सौहार्द जोशी के अनुसार, यदि तिब्बत में ही बाढ़ बनने की पूर्व जानकारी मिल जाती, तो तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता था।