सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ते भारत को साइबर, भू-राजनीतिक खतरों से सतर्क रहने की जरूरत: अश्विनी वैष्णव

Edited By Updated: 20 Sep, 2026 03:27 PM

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भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में स्थापित कुछ हितधारक 'खतरे' के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में भारत को संभावित साइबर हमलों, भू-राजनीतिक जोखिमों और अन्य व्यवधानों से निपटने के लिए सतर्क रहना होगा। केंद्रीय...

नई दिल्लीः भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में स्थापित कुछ हितधारक 'खतरे' के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में भारत को संभावित साइबर हमलों, भू-राजनीतिक जोखिमों और अन्य व्यवधानों से निपटने के लिए सतर्क रहना होगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बात कही है।

वैष्णव ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि भारत अब ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जो सेमीकंडक्टर के डिजाइन और विनिर्माण-दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। ऐसे में वैश्विक चिप उद्योग में पहले से मजबूत स्थिति रखने वाले कुछ देशों और कंपनियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''भारत को इस बदलाव से जुड़े संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति लगातार सजग रहना होगा।'' मंत्री ने कहा, ''भारत अब एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है जो चिप का डिजाइन और विनिर्माण कर सकता है। जाहिर है, इसे कई स्थापित खिलाड़ियों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।'' वैष्णव ने बताया कि उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को स्पष्ट रूप से संभावित खतरों के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को साइबर हमलों के साथ-साथ अन्य प्रकार के व्यवधानों और जोखिमों के लिए भी अपनी तैयारियां मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं और अपने उत्पादों के विकास तथा विनिर्माण के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। ऐसे में भारत अपनी उभरती रणनीतिक स्थिति को हल्के में नहीं ले सकता। भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को केवल चिप असेंबली और परीक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन, विनिर्माण, उपकरण, सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन समेत पूरे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना है। जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर योजना के पहले चरण में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें से माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी समेत पांच परियोजनाएं वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा का असर हाल में आयोजित सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी दिखाई दिया। इस दौरान कई बड़ी निवेश घोषणाएं हुईं। इनमें एप्लाइड मैटेरियल्स की 2035 तक भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर निवेश की योजना, लैम रिसर्च का 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क और फुजीफिल्म की 800 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर सामग्री इकाई शामिल हैं। भारत की यह पहल देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने और घरेलू तकनीकी एवं विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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