चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ी! भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी 'अरिदमन' और युद्धपोत 'तारागिरी' हुआ तैयार

Edited By Updated: 03 Apr, 2026 11:27 AM

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भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा और सामरिक शक्ति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से दो बड़ी उपलब्धियों की जानकारी साझा की, जिससे न केवल भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि हिंद महासागर...

नेशनल डेस्क: भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा और सामरिक शक्ति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से दो बड़ी उपलब्धियों की जानकारी साझा की, जिससे न केवल भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का दबदबा और अधिक मजबूत होगा। आइए जानते हैं भारत की इन दोनों समुद्री शक्तियों के बारे में-

1. INS अरिदमन: 'शब्द नहीं शक्ति है'

भारत अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन को जल्द ही कमीशन करने जा रहा है। रक्षा मंत्री ने इसे 'शक्ति' का प्रतीक बताते हुए भारतीय नौसेना के लिए एक मील का पत्थर करार दिया है। अरिदमन की मुख्य विशेषताएं और रणनीतिक महत्व-

  • अरिहंत श्रेणी की तीसरी कड़ी: यह उन्नत प्रौद्योगिकी वेसेल (ATV) परियोजना के तहत विकसित तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है।
  • सेकंड-स्ट्राइक क्षमता: भारत की 'नो-फर्स्ट-यूज़' नीति के तहत, यह पनडुब्बी परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी प्रहार करने की भारत की क्षमता को अचूक बनाती है।
  • 90% स्वदेशी तकनीक: विशाखापट्टनम शिप बिल्डिंग सेंटर द्वारा निर्मित इस पनडुब्बी का परमाणु रिएक्टर और अधिकांश कलपुर्जे पूरी तरह स्वदेशी हैं।
  • निरंतर निगरानी: अब अरिहंत और अरिघात के साथ तीसरी पनडुब्बी के आने से भारत समुद्र के भीतर 24x7 रणनीतिक चौकसी रखने में सक्षम होगा।

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2. INS तारागिरी: समंदर का नया शिकारी

आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापट्टनम में स्वदेश निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोत INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित करेंगे। यह युद्धपोत भारत के पूर्वी समुद्री तट की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रोजेक्ट 17A के तहत तारागिरी की खूबियाँ-

  • अदृश्य रहने की क्षमता : लगभग 6,670 टन वजनी इस युद्धपोत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रडार की पकड़ में आसानी से न आए।
  • घातक हथियार प्रणाली: यह पोत सुपरसोनिक सतह-से-सतह मिसाइलों और आधुनिक पनडुब्बी रोधी प्रणालियों से लैस है।
  • आत्मनिर्भरता का उदाहरण: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित इस पोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है, जिसमें 200 से अधिक MSMEs का योगदान है।
  • बहुआयामी भूमिका: युद्धक अभियानों के अलावा, तारागिरी आपदा राहत और मानवीय सहायता कार्यों के लिए भी पूरी तरह सक्षम है।

 

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