Edited By Tanuja,Updated: 11 Feb, 2026 02:03 PM

पूर्व भारतीय उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने कहा है कि बांग्लादेश-अमेरिका के नए व्यापार समझौते से भारत को घबराने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि बांग्लादेश की आर्थिक क्षमता सीमित है और भारत की सप्लाई चेन अभी भी अधिक मज़बूत व प्रतिस्पर्धी है।
International Desk: बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए रेसिप्रोकल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भारत में किसी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है। यह कहना है बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी का। वीणा सिकरी ने कहा कि भारत को इस समझौते से घबराने की कोई वजह नहीं है और इसके पीछे दो अहम कारण हैं। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में बांग्लादेश को अमेरिकी बाज़ार में जीरो टैरिफ मिलने की संभावना है, वे मुख्य रूप से मैन-मेड यार्न, कॉटन यार्न और कपास से जुड़े हैं। “इन सभी उत्पादों की सप्लाई भारत पहले से ही बेहद प्रतिस्पर्धी दामों पर और बहुत तेज़ डिलीवरी के साथ करता रहा है। सिकरी ने कहा बांग्लादेशी निर्यातक भारत से एक हफ्ते के भीतर ये कच्चा माल हासिल कर सकते हैं ।
बोइंग जेट सौदे पर सवाल
वीणा सिकरी ने बांग्लादेश द्वारा बोइंग विमानों की खरीद पर भी सवाल उठाया। “बांग्लादेश बोइंग के इतने बड़े जेट खरीदने की बात कर रहा है, लेकिन भुगतान कौन करेगा? इसके लिए उन्हें IMF से कर्ज़ लेना पड़ेगा। इससे उनकी अर्थव्यवस्था और कमज़ोर होगी,” उन्होंने कहा। गौरतलब है कि अमेरिका और बांग्लादेश ने सोमवार को United States-Bangladesh Agreement on Reciprocal Trade पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और बांग्लादेश के वाणिज्य, वस्त्र, जूट एवं नागरिक उड्डयन सलाहकार शेख बशीर उद्दीन ने हस्ताक्षर किए। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को मज़बूत करेगा। हालांकि, वीणा सिकरी का मानना है कि यह डील भारत के लिए कोई बड़ा व्यापारिक खतरा पैदा नहीं करती, क्योंकि भारत की उत्पादन क्षमता, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय निकटता बांग्लादेश पर अब भी भारी है।