संकट की घड़ी में वेनेजुएला के साथ खड़ा हुआ भारत, भूकंप पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भेजी

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 08:59 PM

india stands with venezuela in its hour of crisis sending relief supplies to ea

भारत ने वेनेजुएला में भूकंप से प्रभावित लोगों की मानवीय सहायता के लिए शुक्रवार को ऑपरेशन अमिस्टैड शुरू किया। बचावकर्मी ढही हुई इमारतों के नीचे जिंदा लोगों की तेजी से तलाश कर रहे हैं। लैटिन अमेरिकी देश में दशकों में आई सबसे बुरी प्राकृतिक आपदा में...

नेशनल डेस्क: भारत ने वेनेजुएला में भूकंप से प्रभावित लोगों की मानवीय सहायता के लिए शुक्रवार को ऑपरेशन अमिस्टैड शुरू किया। बचावकर्मी ढही हुई इमारतों के नीचे जिंदा लोगों की तेजी से तलाश कर रहे हैं। लैटिन अमेरिकी देश में दशकों में आई सबसे बुरी प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 235 से अधिक हो गई है और 4300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। भारत ने इस मामले में तेजी से मानवीय मदद करने हेतु उत्तरी वेनेजुएला में 60 पैरा फील्ड अस्पताल से सेना की 41 सदस्यों वाली मेडिकल टीम भेजी है ।

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आपातकालीन सर्जरी में भारतीय डॉक्टर करेंगे मदद 
भारत के विदेश मंत्रालय ने मिशन की घोषणा करते हुए एक बयान में कहा, 'कम्पाटिर्मोस सु डोलोर। एस्टामोस कॉन उस्टेडेस'(हम आपका दर्द समझते हैं। हम आपके साथ खड़े हैं)। नौ मेडिकल अधिकारी और विशेष सहायक कर्मचारी वाली यह टुकड़ी भारतीय वायु सेना के दो सी-17 वायुयान से लगभग छह टन मेडिकल आपूर्ति और मानवीय मदद लेकर रवाना हुई है। इस तैनाती में भारत की आरोग्य मैत्री पहल के तहत देश में बनाया गया‘भीष्म क्यूब'भी शामिल है। यह एक तेजी से तैनात होने वाला मॉड्यूलर फिल्ड अस्पताल है जो 200 मरीजों का इलाज कर सकता है। यह गंभीर चोटों के इलाज, आपातकालीन सर्जरी और गहन चिकित्सा में भी सहयोग दे सकता है। यह मिशन ऐसे समय में आया है जब वेनेजुएला के अधिकारी देश के उत्तरी इलाके में बुधवार रात (स्थानीय समय) एक मिनट से भी कम समय के अंतर पर आए दो बड़े भूकंपों से हुई तबाही से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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सैकड़ों लोग के मलबे में दबे होने की आशंका 
स्वास्थ्य मंत्री कार्लोस अल्वाराडो ने कहा कि इस आपदा में कम से कम 235 लोग मारे गए हैं और 4,300 से अधिक घायल हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बचाव टीमों के तबाह हुए इलाकों में पहुंचने पर हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। प्रभावित इलाकों में पूरे रिहायशी ब्लॉक ढह गए, जिससे लोग कंक्रीट और मुड़े हुए स्टील के नीचे फंस गए। खोजी कुत्तों, भारी मशीनरी और स्वयंसेवकों की मदद से बचावकर्मी शुक्रवार को भी मलबे में खुदाई करते रहे ताकि बचे हुए लोगों को ढूंढा जा सके। अधिकारियों ने अभी भी लापता लोगों की संख्या का अंदाजा लगाने से मना कर दिया है और आशंका है अभी भी सैकड़ों लोग फंसे हो सकते हैं।

भारतीय डॉक्टर बोले- 'पहले 24 से 72 घंटे बहुत जरूरी
भारतीय डॉक्टरों ने कहा, 'पहले 24 से 72 घंटे बहुत जरूरी होते हैं। जिन लोगों को बचाया जा सकता है, उनमें से अधिकतर को इसी समय में ढूंढना होगा। पहले भी हालांकि चमत्कार हुए हैं और लोग एक सप्ताह बाद भी मलबे से बाहर आए हैं।' इस आपदा ने हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। काराकास और आस-पास के शहरों में, सार्वजनिक पाकर्, खेल के मैदान और सड़कों को अस्थायी आश्रय में बदल दिया गया है क्योंकि लोग भूकंप के बाद के झटकों की चिंताओं के बीच क्षतिग्रस्त इमारतों से बच रहे हैं।

देश भर में स्कूल बंद 
भूकंप के झटके उत्तरी दक्षिणी अमेरिका के एक बड़े हिस्से और ब्राजील के अमेजन इलाके तक में झटके महसूस किए गए। परिवहन और सार्वजनिक ढांचों को भी काफी नुकसान होने की खबर है, जिसमें काराकस के पास सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा भी शामिल है। देश भर में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और कई शैक्षणिक केन्द्रों को अस्थायी आश्रय और मदद बांटने वाले केंद्रों में बदल दिया गया है। भारत की ओर से इसमें त्वरित रूप से हिस्सा लेना अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकटों में सबसे पहले मदद करने वाले के तौर पर उसकी बढ़ती भूमिका दर्शाता है। 

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