भारतीय नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी INS ‘मालवन’, पनडुब्बी रोधी क्षमता होगी मजबूत

Edited By Updated: 19 Sep, 2026 03:15 PM

indigenously built ins malvan inducted into the indian navy

आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।

करवार: भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा हुआ है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी के दूसरे ‘एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) आईएनएस ‘मालवन’ को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। करवार में आयोजित कमीशनिंग समारोह में इस युद्धपोत को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। आईएनएस ‘मालवन’ को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है। इसके नौसेना में शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी के साथ-साथ पनडुब्बी रोधी अभियानों में भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ कर सकेगा अभियान

भारतीय नौसेना के अनुसार, आईएनएस ‘मालवन’ बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वय करते हुए विभिन्न अभियानों में हिस्सा लेने में सक्षम है। इसे उथले पानी में निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

आईएनएस ‘मालवन’ का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों के साथ किया गया है। यह माहे श्रेणी का दूसरा पनडुब्बी रोधी शैलो वाटर क्राफ्ट है। युद्धपोत को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती स्वदेशी निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इसके निर्माण से देश की नौसैनिक डिजाइन, उपकरण निर्माण और विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण की क्षमता को भी बढ़ावा मिला है।

‘बाघ नख’ से प्रेरित है युद्धपोत का प्रतीक चिह्न

आईएनएस ‘मालवन’ के प्रतीक चिह्न में ‘बाघ नख’ को दर्शाया गया है। इसे साहस, युद्ध कौशल, फुर्ती और दुश्मन पर सटीक प्रहार की क्षमता का प्रतीक माना गया है। प्रतीक चिह्न के चारों ओर बनी समुद्री लहरें भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति नौसेना की सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पोत का ध्येय वाक्य ‘साइलेंट क्लॉज’ इसकी गुप्त, तेज और प्रभावी कार्रवाई की क्षमता को दर्शाता है।

पूर्व माइंसवीपर पोत के नाम पर रखा गया ‘मालवन’

आईएनएस ‘मालवन’ का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत ‘मालवन’ के नाम पर रखा गया है। पुराने ‘मालवन’ को 19 वर्षों की सेवा के बाद वर्ष 2003 में नौसेना से सेवामुक्त किया गया था।

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की कमीशनिंग

आईएनएस ‘मालवन’ के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की। समारोह में पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि युद्धपोतों के निर्माण में नौसेना अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का प्रभावी मॉडल है। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त अभियानों की जरूरत पर भी जोर दिया।

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