Edited By Anu Malhotra,Updated: 15 Sep, 2026 01:20 PM

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। ISRO के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मॉनसून के विदा होने के बाद, यानी इस साल के आखिरी महीनों में उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी चक्रवाती...
नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। ISRO के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मॉनसून के विदा होने के बाद, यानी इस साल के आखिरी महीनों में उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी चक्रवाती तूफान (साइक्लोन) आ सकते हैं। ISRO के हालिया अध्ययन के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच उत्तरी हिंद महासागर में कम से कम तीन बड़े और तीव्र चक्रवात बनने के आसार हैं।
स्टडी से पता चलता है कि इन सिस्टम से पैदा होने वाली कुल ऊर्जा सामान्य स्तर से काफी ज़्यादा हो सकती है। रिसर्चर्स का अनुमान है कि मॉनसून के बाद आने वाले चक्रवातों की तीव्रता पिछले 44 सालों के औसत से 83% तक ज़्यादा हो सकती है।
यह अनुमान 'पावर डिसिपेशन इंडेक्स' (PDI) की ज़्यादा वैल्यू पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल ट्रॉपिकल साइक्लोन से निकलने वाली ऊर्जा को मापने के लिए किया जाता है। नतीजों से पता चलता है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लौटने के बाद समुद्र और वातावरण की स्थिति असामान्य रूप से अस्थिर रह सकती है।
ISRO के रिसर्चर्स ने साल के आखिर में चक्रवात की गतिविधि पर असर डालने वाली स्थितियों का पता लगाने के लिए लगभग 40 सालों के समुद्री और वायुमंडलीय डेटा का अध्ययन किया। उन्होंने जनवरी से अगस्त के बीच दर्ज किए गए ग्लोबल क्लाइमेट फैक्टर्स का भी विश्लेषण किया और अक्टूबर-दिसंबर की अवधि के लिए अनुमान लगाने के लिए इस डेटा का इस्तेमाल किया।
तूफान कहां और कब टकराएगा?
यह अनुमान अलग-अलग तूफानों की भविष्यवाणी करने के बजाय चक्रवात के मौसम की कुल संभावित तीव्रता को बताता है। इसमें यह नहीं बताया गया है कि चक्रवात कहां या कब ज़मीन से टकराएगा (लैंडफॉल)। असल में चक्रवात का बनना, उसकी चाल और ज़मीन से टकराना घटना के समय मौसम और समुद्र की स्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रभावित होने वाले 6 राज्य और खतरे की वजह
उत्तर भारतीय महासागर में उठने वाले इन संभावित तूफानों से भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के राज्यों को सतर्क रहने को कहा गया है यहां भारी बारिश होने का अनुमान है। बता दें कि पूर्वी तट में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश और दक्षिणी और पश्चिमी तट में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक राज्य शामिल है।
संभावित नुकसान का खतरा:
तटीय इलाकों में अति-मूसलाधार बारिश और 100 किमी/घंटा से तेज हवाएं चलने की आशंका है वहीं निचले इलाकों में भयंकर जलभराव, बाढ़ और बिजली-यातायात नेटवर्क ठप होने का खतरा बन सकता है।