Edited By Rohini Oberoi,Updated: 02 Aug, 2026 09:41 AM

मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'इंस्टाग्राम' के जरिए युवाओं को हनीट्रैप में फंसाकर रंगदारी वसूलने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में रिठानी निवासी राहुल पाल और पुट्ठा निवासी आकाश को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों...
मेरठ : मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'इंस्टाग्राम' के जरिए युवाओं को हनीट्रैप में फंसाकर रंगदारी वसूलने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में रिठानी निवासी राहुल पाल और पुट्ठा निवासी आकाश को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों को डराने के लिए कभी पुलिसकर्मी, कभी बड़े अफसर तो कभी पत्रकार बनकर कानूनी कार्रवाई की धमकी देता था।
पुलिस के अनुसार ब्रह्मपुरी थाने में नीरज पाल नाम के व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने आरोप लगाया कि शशांक शर्मा, राहुल, आकाश और उनके दो अन्य साथियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसे धमकाया और फर्जी FIR दिखाकर कार्रवाई का डर पैदा किया।
वहीं आरोपियों ने मामले को दबाने के एवज में पीड़ित से 2 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और जबरन उसके बैंक खाते से 10,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। शिकायत मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई जिसने जाल बिछाकर राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरोह के सदस्य इंस्टाग्राम पर लड़की बनकर युवकों से दोस्ती करते थे और उन्हें अपनी बातों में फंसाते थे। पीड़ित को मिलने के लिए मोहकमपुर स्थित एक ऑफिस में बुलाया जाता था। जब पीड़ित वहां पहुंचता तो फर्जी आईडी वाली लड़की गायब हो जाती थी। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य नकली पुलिस अधिकारी बनकर आ धमकते थे। वे फर्जी वीडियो और फर्जी एफआईआर की कॉपी दिखाकर पीड़ित को जेल भेजने की धमकी देते थे और लाखों रुपये वसूलते थे।
वहीं इस मामले में सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई थी कि गिरोह मोहकमपुर में एक 'फर्जी पुलिस चौकी' चला रहा था। एसपी सिटी (SP City) विनायक गोपाल भोंसले ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वहां कोई फर्जी पुलिस चौकी नहीं चल रही थी बल्कि एक प्राइवेट ऑफिस था। इसी ऑफिस से गिरोह अपनी ब्लैकमेलिंग की गतिविधियों को अंजाम देता था।
वहीं पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से ठगी और ब्लैकमेलिंग में इस्तेमाल होने वाला बड़ा सामान बरामद किया है। आरोपियों से वाहनों के उपकरण जैसे कि बिना नंबर प्लेट की कार और एक अलग नंबर प्लेट। 2 मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, वॉकी-टॉकी, टेलीफोन और फोन-पे रिसीवर बॉक्स। फर्जी नेम प्लेट, पुलिस बीट बुक, सरकारी मुहरें, विभिन्न प्रार्थना पत्र, फाइलें और बेंत (डंडा)।
फिलहाल पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और मोबाइल डेटा के आधार पर यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक इंस्टाग्राम के जरिए कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। गिरोह के दो अन्य फरार सदस्यों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।