Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Mar, 2026 11:03 AM

भारत में सस्ता इंटरनेट अब बीते जमाने की बात हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार इंटरनेट डेटा की खपत पर एक नया टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई...
Internet Date Tax : भारत में सस्ता इंटरनेट अब बीते जमाने की बात हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार इंटरनेट डेटा की खपत पर एक नया टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो आपके मोबाइल और ब्रॉडबैंड के बिल में भारी इजाफा होना तय है।
क्यों पड़ने वाली है डेटा पर टैक्स की मार?
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है जहां इंटरनेट डेटा सबसे सस्ता है। सरकार का मानना है कि सस्ती कीमतों की वजह से डेटा का गैर-जरूरी इस्तेमाल बढ़ गया है। इस टैक्स के पीछे सरकार के दो मुख्य उद्देश्य बताए जा रहे हैं:
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स्क्रीन टाइम पर लगाम: सरकार चाहती है कि लोग मोबाइल पर अपना 'स्क्रीन टाइम' कम करें और इंटरनेट का उपयोग केवल जरूरी और सकारात्मक (Positive) कामों के लिए करें।
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कमाई का नया जरिया: वर्तमान में डेटा पर सिर्फ GST लगता है लेकिन देश में बढ़ती डेटा खपत को देखते हुए सरकार इसे राजस्व बढ़ाने का बड़ा मौका मान रही है।

गणित समझिए: कितनी होगी सरकार की कमाई?
बीते साल के आंकड़े बताते हैं कि भारत में कुल 229 अरब GB मोबाइल डेटा का इस्तेमाल किया गया।
एक रुपये का फॉर्मूला: अगर सरकार हर 1 GB डेटा पर महज 1 रुपया भी टैक्स लगाती है तो सीधे तौर पर सरकारी खजाने में 229 अरब रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।

सितंबर तक का समय: DoT तैयार करेगा रिपोर्ट
सरकार ने इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता (Feasibility) जांचने के लिए दूरसंचार विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग को सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। उसे यह बताना होगा कि हर GB के हिसाब से टैक्स वसूलना तकनीकी रूप से कितना संभव है और इसका टेलीकॉम सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा।

आम जनता और विशेषज्ञों की चिंता
इस खबर के बाहर आते ही तकनीकी विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। इसके कई नकारात्मक पहलू भी सामने आ रहे हैं:
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डिजिटल इंडिया को झटका: डेटा महंगा होने से ऑनलाइन एजुकेशन, डिजिटल पेमेंट और वर्क फ्रॉम होम जैसी सेवाओं पर बुरा असर पड़ सकता है।
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इनोवेशन में रुकावट: स्टार्टअप और नए डिजिटल एक्सपेरिमेंट के लिए महंगा डेटा एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है।
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आम आदमी का बजट: गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इंटरनेट का उपयोग विलासिता (Luxury) बन सकता है।