Edited By Parveen Kumar,Updated: 12 Mar, 2026 12:19 AM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता...
नेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, इसलिए इसके बंद होने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
आईईए ने आपात योजना के तहत तेल जारी करने का फैसला किया
इस बीच ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अहम कदम उठाया है। एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने मिलकर करीब 400 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार से जारी करने की सहमति दी है। इस फैसले का मकसद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ाना और सप्लाई में आई कमी को संतुलित करना है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कीमतों में अचानक होने वाले उछाल को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।
पहले भी संकट के दौरान उठाया गया था ऐसा कदम
ऊर्जा एजेंसियों ने इससे पहले भी आपात स्थितियों में अपने भंडार का इस्तेमाल किया है। साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी बाजार में स्थिरता लाने के लिए करीब 182 मिलियन बैरल तेल रिलीज किया गया था। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कदम अस्थायी राहत जरूर देते हैं, लेकिन अगर मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
भारत के लिए फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
इस बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आश्वस्त किया है कि देश में फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है, जो सामान्य स्थिति की तुलना में बेहतर स्तर पर है।
सरकार ने बढ़ाए वैकल्पिक स्रोत
सरकार और तेल कंपनियों ने सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कई वैकल्पिक स्रोतों से भी खरीद बढ़ाई है। अधिकारियों के मुताबिक एलएनजी के अतिरिक्त कार्गो भी खरीदे गए हैं, ताकि आयात में किसी तरह की रुकावट न आए।